वो जो मेहरवान हो गए,
हौसले जवान हो गए,
दुश्मनों को इत्तला करो,
दोस्त बेईमान हो गए,
कल जमीं नहीं मिली जिन्हें,
आज आसमान हो गए,
मुद्दतों से घर नहीं मिला,
हर तरफ मकान हो गए,
(पवन दीक्षित)
हौसले जवान हो गए,
दुश्मनों को इत्तला करो,
दोस्त बेईमान हो गए,
कल जमीं नहीं मिली जिन्हें,
आज आसमान हो गए,
मुद्दतों से घर नहीं मिला,
हर तरफ मकान हो गए,
(पवन दीक्षित)
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