Sunday, 17 November 2013

गंगा तेरा पानी अमृत झर-झर बहता जाए,
युग-युग से इस देश की धरती तुझसे जीवन पाए,

दूर हिमालय से तू आई गीत सुहाने गाती,
बस्ती-बस्ती पर्वत-पर्वत सुख संदेश सुनाती,

तेरी चाँदी जैसी धारा मीलों तक लहराए,
गंगा तेरा पानी अमृत झर-झर बहता जाए,

गंगा तेरा पानी अमृत झर-झर बहता जाए,
युग-युग से इस देश की धरती तुझसे जीवन पाए,

कितने सूरज डूबे उबरे गंगा तेरे द्वारे,
युगों-युगों की कथा सुनाएं तेरे बहते धारे,

तुझको छोड़ के भारत का इतिहास लिखा न जाए,
गंगा तेरा पानी अमृत झर-झर बहता जाए,

इस धरती का दुख सुख तूने अपने बीच समोया,
जब-जब देश गुलाम हुआ है तेरा पानी रोया,

जब-जब हम आजाद हुए हैं तेरे तट मुस्काए,
गंगा तेरा पानी अमृत झर-झर बहता जाए,

(साहिर)

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