Thursday, 21 November 2013


बस्ती-बस्ती परवत-परवत गाता जाए बन्जारा,
लेकर दिल का इकतारा,

पल दो पल का साथ हमारा,पल दो पल की यारी,
आज नहीं तो कल करनी है, चलने की तैयारी,
बस्ती-बस्ती परवत-परवत गाता जाए बन्जारा,
लेकर दिल का इकतारा,

कदम-कदम पर होनी बैठी अपना जाल बिछाए,
इस जीवन की राह में कोई कौन कहाँ रह जाए,
बस्ती-बस्ती परवत-परवत गाता जाए बन्जारा,
लेकर दिल का इकतारा,

धन-दौलत के पीछे क्यों है,ये दुनियाँ दीवानी,
यहाँ की दौलत यहीं रहेगी,साथ नहीं कुछ जानी,
बस्ती-बस्ती परवत-परवत गाता जाए बन्जारा,
लेकर दिल का इकतारा,

सोने-चाँदी में तुलता हो, जहाँ दिलों का प्यार,
आँसू भी बेकार वहाँ पर आहे भी बेकार,
बस्ती-बस्ती परवत-परवत गाता जाए बन्जारा,
लेकर दिल का इकतारा,

दुनियाँ के बाजार में आखिर चाहत भी व्यापार बनी,
तेरे दिल से उनके दिल तक,चाँदी की दीवार बनी,
बस्ती-बस्ती परवत-परवत गाता जाए बन्जारा,
लेकर दिल का इकतारा,

हम जैसों के भाग में लिक्खा चाहत का वरदान नहीं,
जिसने हमको जनम दिया,वो पत्थर है भगवान नहीं,
बस्ती-बस्ती परवत-परवत गाता जाए बन्जारा,
लेकर दिल का इकतारा,

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