Tuesday, 26 November 2013

हम जंगल के वृक्ष बनेंगे



गमले के पौधों का जीवन,
एक अजब दुख भरी कहानी,
हर हालत में खुश रहना है,
कहते जंगल के सैलानी,

जितनी ज्यादा तेज हवा हो,
उतना ही जड़ को पकड़ेंगे,
धरती माँ के अनगढ़ बेटे,
हम जंगल के वृक्ष बनेंगे,

जरा धूप में तेज हवा में,
गमले का पौधा मुरझाता,
पानी थोड़ा अधिक मिले जो,
तो उसका अन्तर खुल जाता,

तेज धूप से नहीं डरेंगे,
तूफानों में जड़ पकड़ेंगे,
मिट्टी से कटाव रोकेंगे,
हम जंगल के वृक्ष बनेंगे,

बढ़ना है छोटे हो जाएं,
माँ की गोदी में सो जाएं,
खुलते जाते अंग, धरा को,
लज्जा का आवरण उढ़ाएं,

पूर्ण समर्पित हो जाने तक,
अपना विजय लक्ष्य पाने तक,
हर बाधा स्वीकार करेंगे,
हम जंगल के वृक्ष बनेंगे,

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