Tuesday, 26 November 2013



मेट्रो रेल मेट्रो रेल ,
जैसे हो जादू का खेल,

दरवाजे हैं खुल जा सिम सिम,
अन्दर वातानुकूलित मौसम,
एक गई तो दूजी आई,
झगड़ा झंझट नहीं झमेल,
मेट्रो रेल मेट्रो रेल

दौड़े खंबों के ऊपर से,
कहीं सुरंगों के अन्दर से,
यह जा वह जा चलती ऐसे,
जैसे हो पानी में ह्वेल,
मेट्रो रेल मेट्रो रेल,

समय और पैसा है बचता,
सुविधाजनक परिवहन सस्ता,
तीन तीन मंज़िल नीचे जा,
चलती कोई हँसी न खेल,
मेट्रो रेल मेट्रो रेल,

आना जाना अब आसान,
लोग देखकर सब हैरान,
आटो बसें कार स्कूटर,
इसके आगे सब हैं फेल,
मेट्रो रेल मेट्रो रेल,

देखो इसमें धुँआ न धूल,
कूड़ा-करकट जाओ भूल,
दूषित पर्यावरण करे जो,
पड़े न कोयला पड़े न तेल,
मेट्रो रेल मेट्रो रेल,

शाहदरा से चली रिठाला,
यूनीवर्सिटी दफ़्तर आला,
गाज़ियाबाद,गुड़गाँव चलेगी,
नोयडा से होकर भंगेल,
मेट्रो रेल मेट्रो रेल,

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