भइया करते हैं व्यायाम,
रोज सुबह वे जल्दी उठ कर,
नित्यक्रिया से निवृत होकर,
मंजन कर और मुँह को धोकर,
रोजाना कसरत करते हैं,
फिर करते हैं पूजा ध्यान,
भइया करते हैं व्यायाम,
सीना उनका काफी चौड़ा,
बड़ों-बड़ों का पंजा मोड़ा,
मुझसे कभी हुई जो गलती,
झट से कान पकड़ कर छोड़ा,
कहते है- आराम हराम,
भइया करते हैं व्यायाम,
प्रतिदिन ही वे पढ़ने जाते,
वापस आकर मुझे पढाते,
गन्दे बच्चे उन्हें न भाते,
मौसम के ताजे फल लाकर,
खाते खिलाते, सुबहो-शाम,
भइया करते हैं व्यायाम,
रोज सुबह वे जल्दी उठ कर,
नित्यक्रिया से निवृत होकर,
मंजन कर और मुँह को धोकर,
रोजाना कसरत करते हैं,
फिर करते हैं पूजा ध्यान,
भइया करते हैं व्यायाम,
सीना उनका काफी चौड़ा,
बड़ों-बड़ों का पंजा मोड़ा,
मुझसे कभी हुई जो गलती,
झट से कान पकड़ कर छोड़ा,
कहते है- आराम हराम,
भइया करते हैं व्यायाम,
प्रतिदिन ही वे पढ़ने जाते,
वापस आकर मुझे पढाते,
गन्दे बच्चे उन्हें न भाते,
मौसम के ताजे फल लाकर,
खाते खिलाते, सुबहो-शाम,
भइया करते हैं व्यायाम,
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