जिससे कोई नहीं दुखी था,
चाहे वह फिर रहा कहीं था,
हिम्मत का सरदार रहा था,
जिससे सबको प्यार रहा था,
एक था अपना प्यारा मोती,याद आए तो आँख है रोती,
जब वह एक छोटा बच्चा था,
सचमुच तब कितना अच्छा था,
पागल माँ से प्यार न पाया,
तब हमने उसको दुलराया,
रक्खा उसका नाम था मोती,याद आए तो आँख है रोती,
उसे न कोई कहीं ले जाए,
इसके कितने किए उपाय,
बाबा से मंतर पढ़वाया,
डाल ओखली मठा पिलाया,
मानी थी कितनी मानौती,एक था अपना प्यारा मोती,
उसकी शैतानी प्यारी थी,
उसकी मक्कारी न्यारी थी,
सभी बडों के बीच नेह की,
वो ही सच्ची अधिकारी थी,
था वह सारे घर की ज्योती,एक था अपना प्यारा मोती,
कितना बड़ा शिकारी था वह,
घर की शान हमारी था वह,
छोटी बड़ी कहानी कितनी,-
का नायक अधिकारी था वह,
याद न कोई लम्हा खोती,याद आए तो आँख है रोती,
रहा वो जब तक घर आँगन में,
कोई न चिन्ता व्यापी मन में,
घर में रहते थे बे खटके,
गर्मी सर्दी के मौसम में,
हम रहते निश्चिन्त,हमेशा उसकी पहरेदारी होती,
उसने एक कौए को मारा,
बिल्ली तक का किया सफाया,
और तो और तेज था इतना,
उससे एक खरगोश भी हारा,
थी हर बाजी उसने जीती,ऐस था वो अपना मोती,
पर अंतिम बाजी वह हारा,
इस दुनियाँ से किया किनारा,
ऐसे छोड़ चला वह सब कुछ,
जैसे उसको कुछ ना प्यारा,
यही राज़ जीवन की ज्योती,जिसको बेहतर समझा मोती,
याद न कोई लम्हा खोती, याद आए तो आँख है रोती,
एक था अपना प्यारा मोती,
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