Wednesday, 27 November 2013

अगर आदमी को भी जो बच्चा होता,
सोचो प्यारे तब कितना अच्छा होता,

जनकर वह कहलाता सही जन्मदाता,
बच्चे दुख में कहते- ,मरे हाय पापा,

गृहस्थी के बंधन में ज्यादा बंध जाता,
तब इतना निश्चिंत न इंसां रह पाता,

होते कितने परिवर्तन सोच हँसी आती,
ये चौड़ा चकला सीना,बन जाता छाती,

कैसे देता ताने, अपनी घरवाली को,
रहता घर में फिर, बच्चों की रखवाली को,

लगन,समर्पण,स्नेह प्रेम सच्चा होता,
अगर आदमी के भी जो, बच्चा होता,

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