लो अपना जहाँ दुनिया वालो,
हम इस दुनिया को छोड़ चले,
जो रिश्ते-नाते जोड़े थे,
वह रिश्ते नाते तोड़ चले,
कुछ सुख के सपने देख चले,
कुछ दुख के सदमे झेल चले,
तक़दीर की अंधी गर्दिश ने,
जो खेल खिलाए खेल चले,
हर चीज तुम्हें लौटा दी है,
हम ले के नहीं कुछ साथ चले,
फिर दोष न देना अय लोगो,
हम देख लो खाली हाथ चले,
ये राह अकेली कटती है,
यहाँ साथ न कोई यार चले,
उस पार न जाने क्या पाएँ,
इस पार तो सब कुछ हार चले,
हम इस दुनिया को छोड़ चले,
जो रिश्ते-नाते जोड़े थे,
वह रिश्ते नाते तोड़ चले,
कुछ सुख के सपने देख चले,
कुछ दुख के सदमे झेल चले,
तक़दीर की अंधी गर्दिश ने,
जो खेल खिलाए खेल चले,
हर चीज तुम्हें लौटा दी है,
हम ले के नहीं कुछ साथ चले,
फिर दोष न देना अय लोगो,
हम देख लो खाली हाथ चले,
ये राह अकेली कटती है,
यहाँ साथ न कोई यार चले,
उस पार न जाने क्या पाएँ,
इस पार तो सब कुछ हार चले,
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