Friday, 8 November 2013

नीलकण्ठ जो है अखण्ड,
ऊँची-नीची राह,क्या वाह वाह,

सब एक रंग, हों संग-संग,
हम क्या करेंगे,बोलो क्या करेंगे,

मज़े करेंगे,मज़े करेंगे,मज़े करेंगे,-3

ऊँचे नीचे रस्ते होइंगे,
चल-चल हालत खस्ते होइंगे,

भूलभुलैया हो जाएँगे,
भटके तो हम खो जाइंगे,

क्या करेंगे, बोलो क्या करेंगे,
संग चलेंगे संग चलेंगे संग चलेंगे -3

कहा सुना जो अपनाता,
जहाँ कहें रुक,रुक जाता,

थमता चलता सुख पाता,
वही है ट्रेकर कहलाता,
रुको.......... थम..

दिल्ली के दिलदार आए है,
यारों के जो यार आए हैं,

अड़ जाएँगे नहीं झुकेंगे,
रोके पे भी नहीं रुकेंगे,

नीलकण्ठ पे जा रहे होयंगे,
पीछे लड़के आ रहे होयंगे,

क्या करेंगे,बोलो क्या करेंगे,
सीधे चलेंगे,सीधे चलेंगे,सीधे चलेंगे,-3

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