जब होठों की हँसी लिखो तो,मन की छिपी उदासी लिखना,
हर चेहरे की भाषा पढ़कर,सुख दुख है अविनाशी लिखना,.
दीन धरम की बातों में है,कितनी बात सियासी लिखना,
जब भी कथा लिखो दशरथ की,राम हुए वनवासी लिखना,
इतना स्वाभिमान रख लेना,कलम न होगी दासी लिखना,
जो भी लिखना सच ही लिखना,चाहे बात जरा सी लिखना,
(गिरिराज)
हर चेहरे की भाषा पढ़कर,सुख दुख है अविनाशी लिखना,.
दीन धरम की बातों में है,कितनी बात सियासी लिखना,
जब भी कथा लिखो दशरथ की,राम हुए वनवासी लिखना,
इतना स्वाभिमान रख लेना,कलम न होगी दासी लिखना,
जो भी लिखना सच ही लिखना,चाहे बात जरा सी लिखना,
(गिरिराज)
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