Sunday, 17 November 2013

जाग तुझको दूर जाना,
बाँध लेंगे क्या तुझे,ये मोम के बन्धन सजीले,
पन्थ की बाधा बनेंगे,तितलियों के पर रंगीले,
विश्व का क्रन्दन भुला देगी मधुप की मधुर गुनगुन,
क्या डुबो देंगे तुझे ये फूल के दल ओस गीले,
तू न अपनी छाँव को अपने लिए कारा बनाना,
जाग तुझको दूर जाना

(महादेवी वर्मा)

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