Friday, 8 November 2013

आज की रात बाँहों में सो जाइए,
क्या पता ये मिलन फिर दुबारा न हो,
या दुबारा भी हो तो भरोसा नहीं,
मन हमारा भी हो मन तुम्हारा भी हो,...

आज की रात आँखों में खो जाइए,
क्या पता कल नयन हो नज़ारा हो,
या नज़ारा भी हो तो भरोसा नहीं,
मन हमारा भी हो मन तुम्हारा भी हो,

(आत्मप्रकाश शुक्ल)

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