Friday, 8 November 2013

आप आए तो खयाले दिले नाशाद आया,
कितने भूले हुए जख्मों का पता याद आया,

आपके लब पे कभी अपना भी नाम आया था,
शोख नज़रों से मोहब्बत का सलाम आया था,
उम्र भर साथ निभाने का पयाम आया था,
आपको देख के वो अहदे- वफा याद आया,

आप आए तो खयाले दिले नाशाद आया,

रुह में जल उठे बुझती हुई यादों के दिए,
कैसे दीवाने थे हम आपको पाने के लिए,
यूँ तो कुछ कम नहीं जो आपने एहसान किए,
पर जो माँगे से न पाया वो सिला याद आया,

आप आए तो खयाले दिले नाशाद आया,

आज वो बात नहीं फिर भी कोई बात तो है,
मेरे हिस्से मे ये हल्की सी मुलाकात तो है,
ग़ैर का होके भी ये हुश्न मेरे साथ तो है,
हाय किस वक्त मुझे कब का गिला याद आया,

आप आए तो खयाले दिले नाशाद आया,

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