तू दाता और हम हैं भिखारी,तू स्वामी हम सेवक,
सुख के झूलों में तू झुलाए, चाहे काँटों में रख,
छूटे न हमसे तेरा नाता, जीवन या कि मरण में,
प्रभू जी हमें,लेना अपनी शरण में.....
तू है दया का भरा समन्दर, हम जन्मों के प्यासे,
अन्धकार है सारे जग में, पाएँ ज्योति कहाँ से,
ना हम जाने तेरी भक्ति , ना पूजा की रीत,
हम वो भिखारी तेरे दर के,हार को समझे जीत,
हम बालक नादान प्रभू जी हमें लेना अपनी शरण में,
दे दो हमें भी ज्ञान जगह जी हमें देना अपने चरण में,
सुख के झूलों में तू झुलाए, चाहे काँटों में रख,
छूटे न हमसे तेरा नाता, जीवन या कि मरण में,
प्रभू जी हमें,लेना अपनी शरण में.....
तू है दया का भरा समन्दर, हम जन्मों के प्यासे,
अन्धकार है सारे जग में, पाएँ ज्योति कहाँ से,
ना हम जाने तेरी भक्ति , ना पूजा की रीत,
हम वो भिखारी तेरे दर के,हार को समझे जीत,
हम बालक नादान प्रभू जी हमें लेना अपनी शरण में,
दे दो हमें भी ज्ञान जगह जी हमें देना अपने चरण में,
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