दिल्ली की है शान मेट्रो,
हम सबका अभिमान मेट्रो,
समय कीमती कितना होता,
करवाती यह ज्ञान मेट्रो,
दोड़े खम्बों के ऊपर से,
बैठने वाले बैठें तनकर,
जमींदोज़ सुंरंगों में भी,
नवयुग का वरदान मेट्रो,
बैठ गया है एक बार जो,
चाहे बैठना बार-बार वो,
डी टी सी ब्लू लाइन आटो,
सबके काटे कान मेट्रो,
तेल न कोयला धुँआ न धूल,
कूड़ा-करकट जाओ भूल,
आज नहीं तो कल बनेगी,
यातायात की जान मेट्रो,
भारत की ये नई विरासत,
कोई करना नहीं शरारत,
आगे पीढ़ियाँ याद करेंगी,
ऐसा एक अभियान मेट्रो,
हम सबका अभिमान मेट्रो,
समय कीमती कितना होता,
करवाती यह ज्ञान मेट्रो,
दोड़े खम्बों के ऊपर से,
बैठने वाले बैठें तनकर,
जमींदोज़ सुंरंगों में भी,
नवयुग का वरदान मेट्रो,
बैठ गया है एक बार जो,
चाहे बैठना बार-बार वो,
डी टी सी ब्लू लाइन आटो,
सबके काटे कान मेट्रो,
तेल न कोयला धुँआ न धूल,
कूड़ा-करकट जाओ भूल,
आज नहीं तो कल बनेगी,
यातायात की जान मेट्रो,
भारत की ये नई विरासत,
कोई करना नहीं शरारत,
आगे पीढ़ियाँ याद करेंगी,
ऐसा एक अभियान मेट्रो,
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