Friday, 8 November 2013

चाँद मद्धम है, आसमा चुप है, नींद की गोद में जहाँ चुप है,

दूर वादी में दूधिया बादल,झुक के पर्वत को प्यार करते हैं,
दिल में नाकाम हसरतें लेकर, हम तेरा इंतजार करते हैं,

इन बहारों के साए में आजा,फिर मोहब्बत जवाँ रहे न रहे,
जिन्दगी तेरी नामुरादों पर, कल तलक मेहरबाँ रहे न रहे,

रोज की तरह आज भी तारे, सुबह की गर्द में ना खो जाएँ,
आ तेरे ग़म में जागती आँखें,कम से कम एक रात सो जाएँ,

चाँद मद्धम है,आसमा चुप है,नींद की गोद में जहाँ चुप है,

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