Wednesday, 20 November 2013

शुभसंध्या मित्रो,

जिसे तू क़ुबूल कर ले, वो अदा कहाँ से लाऊँ,
तेरे दिल को लुभा ले, वो सदा कहाँ से लाऊँ,

मैं वो फूल हूँ कि जिसको गया हर कोई मसल के,
मेरी उम्र बह गई है, मेरे आँसुओं में ढ़ल के,

जो बहार बन के बरसे, वो घटा कहाँ से लाऊँ,
तेरे दिल को लुभा ले, वो सदा कहाँ से लाऊँ,

तुझे और की तमन्ना मुझे तेरी आरज़ू है,
तेरे दिल में ग़म ही ग़म हैं,मेरे दिल में तू ही तू है,

जो दिलों को चैन दे दे, वो दवा कहाँ से लाऊँ,
तेरे दिल को लुभा ले, वो सदा कहाँ से लाऊँ,

मेरी बेबसी है जाहिर मेरी आहे-बेअसर से,
कभी मौत भी जो माँगी,तो न पाई उसके दर से,

जो मुराद ले के आए, वो दुआ कहाँ से लाऊँ,
तेरे दिल को लुभा ले, वो सदा कहाँ से लाऊँ,

जिसे तू क़ुबूल कर ले, वो अदा कहाँ से लाऊँ,
तेरे दिल को लुभा ले, वो सदा कहाँ से लाऊँ,

(साहिर)

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