Friday, 8 November 2013


आज की रात नहीं शिकवे शिकायत के लिए,


आज हर लम्हा,हर एक पल है मौहब्बत के लिए,
रेशमी सेज है महकी हुई तन्हाई है,
आज की रात मुरादों की बारात आई है,
आज की रात नहीं शिकवे शिकायत के लिए,

आज हर लम्हा,हर एक पल है मौहब्बत के लिए,

हर गुनाह आज मुकद्दस है फरिश्तों की तरह,
काँपते होठों को मिल जाने दो रिश्तों की तरह,
आज मिलने में न उलझन है न रुसवाई है,
आज की रात नहीं शिकवे शिकायत के लिए,

अपनी ज़ुल्फें मेरे शानों पे बिखर जाने दो,
इस हसीं रात को कुछ और निखर जाने दो,
सुबह ने आज न आने की कसम खाई है,
आज की रात नहीं शिकवे शिकायत के लिए,

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