Tuesday, 19 November 2013



मैंने चाँद और सितारों की तमन्ना की थी,
मुझको रातों की सियाही के सिवा कुछ न मिला,

मैं वो नग्मा हूँ जिसे प्यार की महफ़िल न मिली,
वो मुसाफिर हूँ जिसे कोई भी मंज़िल न मिली,

जख़्म पाए हैं बहारों की तमन्ना की थी,
मैंने चाँद और सितारों की तमन्ना की थी,

किसी गेसू किसी आँचल का सहारा भी नहीं,
रास्ते में कोई धुँधला सा सितारा भी नहीं,

मेरी नज़रों ने नज़ारों की तमन्ना की थी,
मैंने चाँद और सितारों की तमन्ना की थी,

दिल में नाकाम उम्मीदों के बसेरे पाए,
रोशनी लेने को निकला तो अँधेरे पाए,

रंग और नूर के धारों की तमन्ना की थी,
मैंने चाँद और सितारों की तमन्ना की थी,

मेरी राहों से जुदा हो गईं राहें उनकी,
आज बदली नज़र आतीं हैं निगाहें उनकी,

जिनसे इस दिल ने सहारों की तमन्ना की थी,
मैंने चाँद और सितारों की तमन्ना की थी,

प्यार माँगा तो सिसकते हुए अरमान मिले,
चैन चाहा तो उमड़ते हुए तूफान मिले,

डूबते दिल ने किनारों की तमन्ना की थी,
मैंने चाँद और सितारों की तमन्ना की थी,

(साहिर)

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