कल का हिन्दुस्तान.........
Thursday, 25 June 2015
जो न हो पाई अभी तक,वो करामात हुई,
आप आए हमारे शहर में बरसात हुई,
तन और मन की थकन को,
तुरत गए हम भूल,
जब आँखों सामने ,
आये सुंदर फूल,
"कुदरत ने हमको दिया, फूलों का उपहार,
उनके जैसा मन लिए, कर लें हम स्वीकार"
ऊँघे मलती आँख को,चुनरी हरी संभाल,
धीरे -- धीरे जागती, सुबहे -- नैनीताल,
मैं बर्फीले देश का वासी,
पेंग्विन मेरा नाम,
मछली कीडे खाना ठहरा,
मुझ पक्षी का काम,
पंख है लेकिन उड ना पाऊँ,
तैरूँ मैं भरपूर,
अगर कभी मिलना मुझसे तो,
करना प्यार जरूर,
हैं शरीर पर बाल हमारे,
काले और सफेद ,
नर हूँ या मादा हूँ तुम ना,
कर पाओगे भेद,
जब भी दौड लगाता,आती,
चेहरों पर मुस्कान,
आना मेरे देश घूमने ,
देता हूँ पैगाम,
पाकर भी कुछ खोया खोया लगता हूँ,
जागा हूँ पर सोया सोया लगता हूँ,
कौन समंदर आ बैठा इन आँखों में,
अब रोया तब रोया रोया लगता हूँ,
पूरा होगा कब अब ये तो रब जाने,
पलकों पर इक ख्वाब संजोया लगता हूँ,
दृश्यमान हरसू वह कितने रूपों में,
माला में ज्यों फूल पिरोया लगता हूँ,
सोच रहा कब, कैसे,कहूँ ,कहाँ हूँ मैं,
हूँ मैं अब या नहीं हूँ ,गोया लगता हूँ,
थोडा - थोडा करें अगर,
स्वर्ग आएगा इस भू पर,
भले देर से करे असर,
स्वर्ग आएगा इस भू पर,
घूम जाएगी जहाँ नजर,
स्वर्ग आएगा इस भू पर,
रखें उठा ना कोई कसर,
स्वर्ग आएगा इस भू पर,
दुनिया होगी जगर मगर,
स्वर्ग आएगा इस भू पर,
भूलेंगे ना जीवन भर,
स्वर्ग आएगा इस भू पर,
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