Sunday, 24 August 2014

उठ जाओ अब सुबह हुई ,
तुम आँखें तो खोलो,

चिड़ियाँ बोलीं मिसरी जैसी,
बोली तुम बोलो,

खुली हवा में टहलो घूमो,
मन क्यों सुस्त रहे,

थोड़ा योग करो, दोडो,तो,
तन भी चुस्त रहे,

सूरज निकले उससे पहले,
उठो नहा लोगे,

सारा दिन हँसते बीतेगा,
खुशियां पा लोगे,

अपना काम करो खुद सारा,
अच्छे बन जाओ,

प्यार करें सब तुमको,ऐसे,
बच्चे बन जाओ,