Thursday, 25 June 2015


रंग कहाँ से लाती इतने,
सुंदर पंखों वाली,

सब दिन रहो फुदकती,
फिरती इस डाली उस डाली,

कभी हमें ले चलो घुमाने,
अपने गाँव शहर में,

कहाँ बैठ गाने गाती,
गर्मी की दो पहर में,

बारिश में भीगती, न मिलती,
दूर -दूर तक छाँव,

सर्दी में बिन स्वेटर कैसे रहती,
भला बताओ,

समय बिताती हो तुम कैसे,
जब होती हो खाली,

रंग कहाँ से लाती इतने,
सुंदर पंखों वाली,

No comments: