Monday, 22 May 2017

राह में तुम मत सोना
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माँ ने सब्जी लेने चुन्नू को,
भेजा बाजार,
लगे राह में खेल खेलने,
बन्द हुआ बाजार,
खाली हाथ लौटकर आए,
डाँट पड़ी डटकर,
चुन्नू गुस्से में बोले-अब,
नहीं घुसेंगे घर,
माँ ने हँसकर कहा-
बिना सब्जी के खाना खाना,
आज नहीं ला पाए तो फिर,
कल सुबह ले आना,
मेहनत का फल अच्छा,
लापरवाही ठीक न होती,
जीत पे हँसती ये आँखें,
और असफलता पर रोती,
जीवन में पल-पल पर ऐसी,
मुश्किल घड़ियाँ आतीं,
पर वे आसमान पर छाई,
बदली सी हट जातीं,
सीखो सबक हर एक गलती से,
ऐसे कभी न रोना,
आँखों में मंज़िल को रख लो,
राह में अब मत सोना,

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