बड़े दिनों के बाद हैं आए,
छुट्टी वाले दिन,
कितना मेरे मन को भाए,
छुट्टी वाले दिन,
रोज-रोज जल्दी उठने की,
भागमभाग नहीं,
अब तो जब हम उठ जाएंगे,
होगी सुबह तभी,
पापा मम्मी भी अब ज्यादा,
जोर नहीं देंगे,
'छुट्टी है सोने दो' आपस में,
मिल कह लेंगे,
बस्ता कापी पेंसिल से अब,
कुट्टी वाले दिन,
बहुत दिनों के बाद हैं आए,
छुट्टी वाले दिन,
जाएंगे हम सब मिलकर,
दादी नानी के गाँव,
जहाँ नदी का शीतल जल,
पेड़ों की ठंड़ी छाँव,
तोड़ डाल से आम और जामुन,
हम खाएंगे,
दोस्त गाय बकरी के संग,
खेतों में जाएंगे,
भूलेंगे सर की मैडम की,
घुट्टी वाले दिन,
बहुत दिनों के बाद हैं आए,
छुट्टी वाले दिन,
काश कहीं से मिल जाए,
हमको ऐसी पावर,
बुर्ज खलीफा पर घूूमें,
टहलें एफिल टावर,
सागर के नीचे की दुनियां,
देखें जी भर के,
नभ के तारे सभी खंगालें,
एक-एक कर के,
किस्से और कहानी झूठा-
झुट्ठी वाले दिन,
बहुत दिनों के बाद हैं आए,
छुट्टी वाले दिन,
छुट्टी वाले दिन,
कितना मेरे मन को भाए,
छुट्टी वाले दिन,
रोज-रोज जल्दी उठने की,
भागमभाग नहीं,
अब तो जब हम उठ जाएंगे,
होगी सुबह तभी,
पापा मम्मी भी अब ज्यादा,
जोर नहीं देंगे,
'छुट्टी है सोने दो' आपस में,
मिल कह लेंगे,
बस्ता कापी पेंसिल से अब,
कुट्टी वाले दिन,
बहुत दिनों के बाद हैं आए,
छुट्टी वाले दिन,
जाएंगे हम सब मिलकर,
दादी नानी के गाँव,
जहाँ नदी का शीतल जल,
पेड़ों की ठंड़ी छाँव,
तोड़ डाल से आम और जामुन,
हम खाएंगे,
दोस्त गाय बकरी के संग,
खेतों में जाएंगे,
भूलेंगे सर की मैडम की,
घुट्टी वाले दिन,
बहुत दिनों के बाद हैं आए,
छुट्टी वाले दिन,
काश कहीं से मिल जाए,
हमको ऐसी पावर,
बुर्ज खलीफा पर घूूमें,
टहलें एफिल टावर,
सागर के नीचे की दुनियां,
देखें जी भर के,
नभ के तारे सभी खंगालें,
एक-एक कर के,
किस्से और कहानी झूठा-
झुट्ठी वाले दिन,
बहुत दिनों के बाद हैं आए,
छुट्टी वाले दिन,
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