Monday, 22 May 2017

सबकी जेबों में रहते हो,
हो आखिर तुम किसके पैसे,
आम संतरे टॉफी खाते
वो, होते हैं जिसके पैसे,

बोले दादाजी गौरव से,
जेब से मेरी खिसके पैसे,
गौरव हँस कहता दादा से,
पास में जिसके उसके पैसे,
दादाजी ने फिर समझाया,
गौरव बेटा ऐसा कैसे,
चीज के बदले चीज मिले
या मेहनत की है कीमत पैसे,
पैसों से खट्टा मीठा लो,
फिर वो चाहो चक्खो जैसे,
पहले मीठी सी पप्पी दो,
फिर जेबों में रक्खो पैसे,

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