Tuesday, 2 September 2014

खूब झमाझम बारिश आयी,मौसम हुआ सुहाना,
घर पर बैठ पकौड़े खाओ,आज कहीं मत जाना,

नहा रहीं पेड़ों की पत्ती, खूबसूरत लगती हैं,
टपक रही पत्तों से बूँदें, झरने सी झरतीं हैं,

छत के नीचे दुबके बैठे, घरवाले, पशु-पक्षी,
शरण यहाँ सबने ले रखी, बच्चे हों या बच्ची,

बारिश में निकलूँ,भीगूँ मैं ऐसा सोच रहा हूँ,
तन से थोड़ा लेकिन मन से पूरा भीग रहा हूँ,

बूँदें तन को सिहरातीं तो मन भी खुश हो जाता,
कभी सोचता आखिर हमने अपनाया क्यों छाता,

कदम रोक कहता मन मुझसे,दुनियादारी सीखूँ,
पागल मन बावरा सोचता, मैं बारिश में भीगूँ,

Sunday, 24 August 2014

उठ जाओ अब सुबह हुई ,
तुम आँखें तो खोलो,

चिड़ियाँ बोलीं मिसरी जैसी,
बोली तुम बोलो,

खुली हवा में टहलो घूमो,
मन क्यों सुस्त रहे,

थोड़ा योग करो, दोडो,तो,
तन भी चुस्त रहे,

सूरज निकले उससे पहले,
उठो नहा लोगे,

सारा दिन हँसते बीतेगा,
खुशियां पा लोगे,

अपना काम करो खुद सारा,
अच्छे बन जाओ,

प्यार करें सब तुमको,ऐसे,
बच्चे बन जाओ,

Sunday, 10 August 2014

लो ये दिन भी बीत गया,

यादोँ में रह जाने को,
कभी न वापस आने को,
लुटते हुए खजाने को,

भरा या हमने, रीत गया,
पर ये दिन भी बीत गया,

अपना या बेगाना था,
चमन या कि वीराना था,
सच्चा या अफसाना था,

जो भी रहा,व्यतीत गया,
हाँ,ये दिन भी बीत गया,

अब उसमें अपना क्या है,
समझो तो सपना सा है,
मन दे रहा दिलासा है,

दुश्मन था या मीत गया,
जो भी हो पर बीत गया,

था अपना पर भूत हुआ,
ज्यों गहरा हो एक कुँआ,
खेला हमने एक जुआ,

हार गया या जीत गया,
पर ये दिन भी बीत गया,

अब न कभी आएँ वो पल,
कल तो बस होता है कल,
बस उसका मिलता है फल,

खट्टा था या स्वीट गया,
हाँ ये दिन भी बीत गया,

पल प्रतिपल पय सम पी लें,
साँसों की सरगम सी लें,
जरा-जरा जीवन जी लें,

बीत गया सो बीत गया,
बीत गया सो बीत गया,

मेरे भइया मेरे चन्दा मेरे अनमोल रतन,
तेरे बदले में जमाने की कोई चीज न लूँ,

तेरी साँसों की कसम खा के हवा चलती है,
तेरे चेहरे की झलक पा के बहार आती है,

एक पल भी मेरी नज़रों से जो तू ओझल हो,
हर तरफ मेरी नज़र तुझको पुकार आती है,

मेरे भइया मेरे चन्दा मेरे....

तेरे चेहरे की महकती हुई लडियों के लिए,
अनगिनत फूल उम्मीदों के चुने हैं मैने,

वो भी दिन आये कि इन ख्वाबों को ताबीर मिले,
तेरी खातिर जो हसीं ख्वाब बुने हैं मैंने,

मेरे भइया मेरे चंदा मेरे अनमोल रतन,
तेरे बदले में जमाने की कोई चीज न लूँ,त

Sunday, 6 July 2014

कई दिनों के बाद है आया छुट्टी वाला दिन
कितना मेरे मन को भाया छुट्टी वाला दिन

आज नहीं उठना है जल्दी सोएँगे जी भर हम
ले जाओ क्या कर लेंगें ये चाय भला पीकर हम

हफ्ते भर जब खटे तो पाया  छुट्टी वाला दिन
कई दिनों के बाद है आया छुट्टी वाला दिन

क्यों टेँशन हो आज नहीं स्कूल हमें जाना
नही टोकना काम करेँगे हम तो मनमाना

कितनी सारी खुशियाँ लाया छुट्टी वाला दिन
कई दिनो के बाद है आया छुट्टी वीला दिन

जब भी हो रूटीन जिन्दगी सहा नहीं जाता
लगता एक मशीन जिन्दगी मजा नहीं आता

परिवर्तन ले करके आया छुट्टी वाला दिन
कई दिनो के बाद है आया छुट्टी वाला दिन

Thursday, 3 July 2014

प्रेम पथ पर चल पड़ा ये दिल सदा पागल रहा
हादसों की धूप में साया बना बादल रहा
जो मिला अब तक मिलेगा और भी वो इसलिये
मेरे अरमानों पे तेरे प्यार का आँचल रहा

खत्म हुई गर्मी की छुट्टी फिर स्कूल खुले
बहुत दिनों के बाद यार खुशियों के फूल खिले

खाली बैठे-बैठे अपना जी उकताया था
टी वी कम्प्यूटर गर्मी में रास न आया था

जी करता था वर्षा हो शाखोँ के पात धुले

होमवर्क भी खत्म हुआ नानी के घर फेरा
खरबूजा तरबूज आम का उखड़ गया डेरा

मन था किसे सुनाएँ किस्से साथी खूब मिले

फिर से भर नूतन उमंग में पढने जाएँगें
सीखेंगे समझेँगे अपना ज्ञान बढाएँगे

बिगडे काम बना करते आपस में हिले मिले

पढने लिखने से जीवन में अंतर आता है
सही गलत का भेद ये मन बेहतर कर पाता है

मिले हवा ये तभी कि जब पंखे की पवन डुले
खत्म हुई गर्मी की छुट्टी फिर स्कूल खुले