Thursday, 25 June 2015


अल्मोडे की बाल मिठाई,
बोलो किसने किसनेे खाई,

पहले बर्फी सी बनबाई,
फिर नन्हीं गोली चिपकाई,

इसे बनाते हैं हलवाई,
या घर में बनती है भाई,

पापाजी ने जब मँगवाई,
लगे झगडने दोनों भाई,

मुझको पहले मुझको पहले,
पापा ने एक - एक पकडाई,

बंद किया आपस में लडना,
हँस कर खाते दोनों भाई,

खुश होकर आपस में कहते,
हमने खाई तुमने खाई,

अल्मोडे की बाल मिठाई,
आए मुझसे मिलने मित्रों,
दूर देश के वासी,

चेहरे पर मुस्कान देखकर,
भागी दूर उदासी,

कितनी दिन और रातें बीतीं,
हम बिछडे हैं कब से,

छुप कर बैठ नहीं सकते हम,
हमें मिलाओ सबसे,

हम भी क्या कम हैं कह बैठे,
बढिए, आगे आएं,

नए बहुत हैं दोस्त आज,
उनसे तुमको मिलवाएं,
साहस कर आगे तो आओ,
कदमों में आएगी मंजिल,

मिल जाएगा हर मनचाहा,
चाहोगे होगा सब हासिल,

खो सकता है कूल किनारा,
बने रहे ग़र यूँ ही गाफिल,

जीतेगा हर बाजी अपनी,
हिम्मत का सरताज मेरा दिल,
हम चिडियों सी चहक - चहक,
घर चिचियाहट से भर दें,

हँस - हँस कर ग़म की सारी,
स्थिति परिवर्तित कर दें,

इस रोती -धोती दुनियाँ को,
हँसने का अवसर दें,

अमृत दें, हमको बदले में,
चाहे लोग जहर दें,

Tuesday, 2 June 2015



यह है हन्सी गाय हमारी,
भोली भाली प्यारी प्यारी,
गौरी माँ की प्यारी बेटी,
सारी ममता उदर समेटी,
घर आई जिस रोज हमारे,
फूल खिल गए घर के सारे,
नंदू उदित सुनयना नंदी,
नाम रखा सबने मिल हन्सी,
छुटकी इसकी बेटी आई,
वह भी सबके मन को भाई,
उसके हाव भाव सब प्यारे,
दूध पी रहे मिल हम सारे,
और कभी मिलकर जो भागे,
रहती हरदम सबसे आगे,
दूध दही मक्खन घी मट्ठा,
सादा फीका मीठा खट्टा,
कमी रही अब नहीं किसी की,
खुश लेकर कई चीज पडोसी,
रोज खिलाते दाना चारा,
और नहलाते, नियम हमारा,
खुश होकर वह दूध पिलाती,
जैसे खुश हो दाना खाती,
सेवा की महिमा है न्यारी,
यह है हन्सी गाय हमारी,

Tuesday, 24 March 2015



राह रोक राधा कहती राजू से,
सुन ओ भइया,
नहीं दिखाई देती अपने आँगन,
अब गौरैया,

खिडकी रोशनदान बंद हैं ,
मिलता नहीं ठिकाना,
लाला की दूकान बंद है,
नहीं मिल रहा दाना,

जो तरंग मोबाइल वाली,
सबको राह दिखाए,
लेकिन बेचारी चिडिया को,
राहों से भटकाए,

इस तरंग से उसकी ,
प्रजनन क्षमता भी घट जाए,
बीज घास के रहे नहीं,
तो गौरैया क्या खाए,

ऊँची ऊँची बिल्डिंग में जब,
बस जाए आबादी,
घर में कैसे पहुँचे चिडिया,
शहर छोड कर भागी,

सुनो बहन हम सब मिलजुल कर,
यही कसम अब खाएं,
रूठी अतिथि देव गौरैया,
को मिल आज मनाएं,

Saturday, 21 March 2015

आसमान से आशीषों की बारिश बरसी,
नया साल है,

मन में उमंगों की नव बेलें सर सर सरसीं,
नया साल है,


कितनी सारी उम्मीदों को लेकर आया,
नया सवेरा,


भूलें सारे ग़म, खुशियों के दीप सजाएं,
नया साल है,