Saturday, 9 February 2019
Saturday, 23 December 2017
हम दीवाने जरा अलग
मनचाहा मिल सका नहीं ग़र,
सबके बहाने अलग-अलग थे,
उम्र - उम्र की बातें होती,
सबके खजाने अलग-अलग थे,
तुमने प्यार के पैसे माँगे,
मैंने दिल से बदला दिल को,
तुम तो निकले बड़े सयाने,
हम दीवाने जरा अलग थे,
सबके बहाने अलग-अलग थे,
उम्र - उम्र की बातें होती,
सबके खजाने अलग-अलग थे,
तुमने प्यार के पैसे माँगे,
मैंने दिल से बदला दिल को,
तुम तो निकले बड़े सयाने,
हम दीवाने जरा अलग थे,
हम कितने लायक हैं
आज घूमने गए सभी हम
छोड़ के अपनी बस्ती,
पैसे खर्चो नहीं मिलेगी
मिली ये खुशियाँ सस्ती,
छोड़ किताबों की बंदिश से,
देखी बाहर दुनिया,
आई जो फुर्ती चुस्ती तो,
बस में कर ली मस्ती,
इस मस्ती में झूम रहे,
हम कितने लायक हैं
छोड़ के अपनी बस्ती,
पैसे खर्चो नहीं मिलेगी
मिली ये खुशियाँ सस्ती,
छोड़ किताबों की बंदिश से,
देखी बाहर दुनिया,
आई जो फुर्ती चुस्ती तो,
बस में कर ली मस्ती,
इस मस्ती में झूम रहे,
हम कितने लायक हैं
जीवन में एक मित्र बनाएं
सोते हैं तो अब जग जाएं,
धरती को कपड़े पहनाएं,
आओ आगे बढ़कर आएं,
जीवन में एक मित्र बनाएं,
प्रतिपल मदद हमारी करते,
गर्मी में आतप को हरते,
फूल औ फल पत्तियाँ दवाएं,
देते शीतल मंद हवाएं,
पानी देकर बड़ा बनाएं,
जीवन में एक मित्र बनाएं
धरती को कपड़े पहनाएं,
आओ आगे बढ़कर आएं,
जीवन में एक मित्र बनाएं,
प्रतिपल मदद हमारी करते,
गर्मी में आतप को हरते,
फूल औ फल पत्तियाँ दवाएं,
देते शीतल मंद हवाएं,
पानी देकर बड़ा बनाएं,
जीवन में एक मित्र बनाएं
बेचैन बहुत फिरना घबराए हुए रहना
इक आग सी जज़्बों की दहकाए हुए रहना
इक आग सी जज़्बों की दहकाए हुए रहना
छलकाए हुए चलना ख़ुशबू लब-ए-लालीं की
इक बाग़ सा साथ अपने महकाए हुए रहना
उस हुस्न का शेवा है जब इश्क़ नज़र आए
पर्दे में चले जाना शरमाए हुए रहना
इक शाम सी कर रखना काजल के करिश्मे से
इक चाँद सा आँखों में चमकाए हुए रहना
आदत ही बना ली है तुम ने तो 'मुनीर' अपनी
जिस शहर में भी रहना उकताए हुए रहना
मुनीर नियाज़ी
इक बाग़ सा साथ अपने महकाए हुए रहना
उस हुस्न का शेवा है जब इश्क़ नज़र आए
पर्दे में चले जाना शरमाए हुए रहना
इक शाम सी कर रखना काजल के करिश्मे से
इक चाँद सा आँखों में चमकाए हुए रहना
आदत ही बना ली है तुम ने तो 'मुनीर' अपनी
जिस शहर में भी रहना उकताए हुए रहना
मुनीर नियाज़ी
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