Tuesday, 24 March 2015



राह रोक राधा कहती राजू से,
सुन ओ भइया,
नहीं दिखाई देती अपने आँगन,
अब गौरैया,

खिडकी रोशनदान बंद हैं ,
मिलता नहीं ठिकाना,
लाला की दूकान बंद है,
नहीं मिल रहा दाना,

जो तरंग मोबाइल वाली,
सबको राह दिखाए,
लेकिन बेचारी चिडिया को,
राहों से भटकाए,

इस तरंग से उसकी ,
प्रजनन क्षमता भी घट जाए,
बीज घास के रहे नहीं,
तो गौरैया क्या खाए,

ऊँची ऊँची बिल्डिंग में जब,
बस जाए आबादी,
घर में कैसे पहुँचे चिडिया,
शहर छोड कर भागी,

सुनो बहन हम सब मिलजुल कर,
यही कसम अब खाएं,
रूठी अतिथि देव गौरैया,
को मिल आज मनाएं,