Monday, 15 April 2013

जिन्दगी तुझी से है


जिन्दगी जो है भँवर,होके उससे भी गुजर,
सच है रास्ता तेरा,हक़ पे जाँ निसार कर,
जल उठें बुझे दिये,हर तरफ प्रकाश भर,
जिन्दगी तुझी से है,जिन्दगी से प्यार कर,

जात-पात रंग नस्ल,धर्म देश काल से,
प्यार है बड़ा महान,रीत रस्म जाल से,
मान लेगा, देख ले तू,प्यार से पुकार कर,
जिन्दगी तुझी से है,जिन्दगी से प्यार कर,

रोकेंगी तुझे यहाँ,जाने कितनी टोलियाँ,
भाँति-भाँति रंग रूप,भाँति-भाँति बोलियाँ,
पर तेरा डिगे न मन,इस सफर से हार कर,
 जिन्दगी तुझी से है,जिन्दगी से प्यार कर,

दुख औ सुख के रास्ते,है तेरे ही वास्ते,
दिल कहे वो कर गुजर,इसमें है बहुत असर,
मान ले यकीन कर,देख कह रही नज़र,
फूल से भी मिल गले,शूल से भी प्यार कर,
जिन्दगी तुझी से है,जिन्दगी से प्यार कर,

देख-सुन समाज को,रस्म और रिवाज़़ को,
कल की बात छोड़़कर,तू सँवार आज को,
कल बनेगा खुद हसीन,तू न इंतजार कर,
जिंदगी तुझी से है,जिंदगी से प्यार कर,

रूप दे कुरूप को,छाँव या कि धूप हो,
तू बदल कसौटियाँ, जो ये धरा अनूप हो,
जिस तरफ से भी गुजर, रास्ता सँवार कर,
जिंदगी तुझी से है,जिंदगी से प्यार कर,

आँख कान खोल कर हर तरफ तू देख ले,
है बहार आय़ी तो,फूल क्यों नहीं खिले,
सच बना भिखारी क्यों,झूठ ही के द्वार पर,
जिन्दगी ये कैसी है,इसमें एक आग भर,
जिन्दगी तुझी से है,जिन्दगी से प्यार कर,

बेटा क्यों तरस रहा है,खेतिहर किसान का,
पेट क्यों भरा हुआ है,सेठ की दुकान का,
देख तू कमी कहाँ है,इसमें तू सुधार कर,
जिन्दगी तुझी से है,जिन्दगी से प्यार कर,

क्या बुरा है क्या भला,कर ये तू ही फैसला,
जड़ बुराई की जहाँ है,तू पकड़ ले वो गला,
जागरूक हों सभी,सबको होशियार कर,
जिंदगी तुझी से है,जिंदगी से प्यार कर,

आसमां से बात कर,तो ले धरा की भी खबर,
कर तू ऐसी कोशिशें जो आम हो छिपा हुनर,
कष्ट हो दुखे न दिल,हर कदम सँभाल कर,
जिंदगी तुझी से है,जिंदगी से प्यार कर,

जो खुशी कहीं-कहीं है,उठ के उसको आम कर,
जिन्दगी पुकारती है,उसको हक़ प्रदान कर,
सृष्टि हो सुरभिमयी,दृष्टि और सुरुचि नय़ी,
हर दिशा जहान में,गूँज उठे गान ये,
अमन और खुशी बिखेर,हर तरफ प्रचार कर,
जिन्दगी तुझी से है,जिन्दगी से प्यार कर,

कदम से मिले कदम,बाँट हो खुशी या ग़म,
एक हो चले जो सब, तो होंगे कामयाब हम,
खिल उठें सुमन, चमन में फिर नई बहार कर,
जिंदगी तुझी से है,जिंदगी से प्यार कर,

जिंदगी जो राग है,तो जिंदगी एक आग भी,
जो ज्वलित अंगार है तो एक रंगीला फाग भी,
मृत्यु से भी मिल गले,पर मौत से पहले न मर,
जिंदगी तुझी से है,जिंदगी से प्यार कर,

दे आवाज जन उठें,तन उठें औ मन उठें,
क्रान्ति की किरन उठे,एक एक कन उठे,
जल उठें बुझे दिये,ऐसी रण हुँकार कर,
जिंदगी तुझी से है,जिंदगी से प्यार कर,

सोच ले विचार कर,मान ले यक़ीन कर,
जिंदगी तुझी से है,जिंदगी से प्यार कर

Sunday, 14 April 2013

देश अपना जल रहा हो, जबकि लपटों में ये सारा,



देश अपना जल रहा हो, जबकि लपटों में ये सारा,
बैठ कर ये देखना सब आज,लगता पाप होगा,
पीढियां हमको न बखशेंगी,समय के इस सफर में,
हम अगर अब चुप रहे,तो गालियां इतिहास देगा

जमीं से अरश तक जिस गीत ने, जादू जगाया था



जमीं से अरश तक जिस गीत ने, जादू जगाया था
यकीं मानों कि ऐसा गीत, साहिर ने बनाया था
कि दिल का दरद ही जिसके कलम की रोशनाई था
जहां में बेकसों का वो मसीहा बनके आया था


अतिशय सहज लभ्य जो हमको..


अतिशय सहज लभ्य जो हमको,क्या दे सकते हैं आनन्द,
मन तो मतवाला उसका,जो सात द्वार के पीछे बन्द,
बिना श्रम किए सोचो तुमको प्राप्य अगर मिल जाएगा,
मंज़िल को मंज़िल कहने में,मानव फिर शरमाएगा,
एक जगह रुक सकती कब है,इस मन की जिज्ञासा,
शब्द असंभव की अब मानव भूल रहा परिभाषा,
समय उमर के साथ सभी के सपने होते हैं,
जिसमें कुछ नितान्त व्यक्तिगत अपने होते हैं,,
जिनमें अपने ही शासन की सृष्टि हुआ करती है,
लक्ष्य एक हों भिन्न जीवनी दृष्टि हुआ करती है,
यदि वह भिन्न नहीं तो पथ में नीरसता आएगी,
है संदिग्ध तुम्हें मंज़िल तक भी वो पहुँचाएगी,
मूल लक्ष्य रख एक राह चिन्तन से नई बनेगी, 
समय और स्थितियों में से होकर जो गुजरेगी,
होती चिंतन के दीपक की क्षीण कभी जब बाती,
तब-तब जीवन के विकास की धारा भी रुक जाती,
अनुभव से औरों के हमको दिशा भले मिलती हो,
संभव है विकास की कोई राह तुम्हें दिखती हो,
लेकिन मत भूलो अनुभव उसका अपना हासिल है,
भिन्न परिस्थिति समय और श्रम का उपजा फल है,
पता तुम्हें हर एक वक्त का अपना है अंदाज़,
कल का सच था होगा,हम देखेंगे क्या है आज,
जहाँ सर्जना नई हर एक पल ऐसा ये संसार,
(
बासी फूल करेंगे कैसे यौवन का श्रंगार,)


मैंने सुना जाते सूरज ने


मैंने सुना जाते सूरज ने, अकड़ भरा संवाद कहा,
बोल तेरा क्या होगा अय दिन, जैसा मेरे साथ रहा,
बस कुछ क्षण की ही देरी है,जाने भी दे तू मुझको,
अंधकार में भटकेगा फिर ,राह न सूझेगी तुझको,
मैं जो गया तो तेरी कोई, बात न बनने पाएगी,
मैं जो गया तो ये सारी चलती दुनियाँ रुक जाएगी,
चारो तरफ फैला सन्नाटा, अंधियारा था दूर तलक,
तभी एक नन्हे दीपक की ,पड़़ी दिखाई एक झलक,
ड्योढ़ी पास फकीरा बोला-बात न कर नक्शेवाली,
कभी किसी के जाने से क्या दुनिया होती है खाली,