Sunday, 14 April 2013

मैंने सुना जाते सूरज ने


मैंने सुना जाते सूरज ने, अकड़ भरा संवाद कहा,
बोल तेरा क्या होगा अय दिन, जैसा मेरे साथ रहा,
बस कुछ क्षण की ही देरी है,जाने भी दे तू मुझको,
अंधकार में भटकेगा फिर ,राह सूझेगी तुझको,
मैं जो गया तो तेरी कोई, बात बनने पाएगी,
मैं जो गय तो ये सारी चलती दुनियाँ रुक जाएगी,
चारो तरफ फैला सन्नाटा, अंधियारा था दूर तलक,
तभी एक नन्हे दीपक की ,पड़़ी दिखाई एक झलक,
ड्योढ़ी पास फकीरा बोला-बात कर नक्शेवाली,
कभी किसी के जाने से क्या दुनिया होती है खाली,

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