Wednesday, 17 April 2013

आपकी शुभकामनाओं से, मुझे संबल मिला है,

आपकी शुभकामनाओं से, मुझे संबल मिला है,
इसलिए उपलब्धियों में, श्रेय भी तो आपका है,

आज है कुछ भी अससंभव, मन नहीं स्वीकारता है,
पर्वतों जैसी चुनौती,पर न ये मन हारता है,

प्राप्ति हर देती निराशा,कामना उत्साह भरती,
नित नये सपने सजाती,उर्वरा मन की ये धरती,

आइये हम नयी सुबह के,नये सपने सजाएँ,
नित बदलते इस जहाँ को,और कुछ बेहतर बनाएँ,

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