चेहरा पहचान खोता जा रहा है,
आदमी गुमनाम होता जा रहा है,
भीड़ ज्यों- ज्यों बढ़ रही है रास्तों पर,
और पथ सुनसान होता जा रहा है,
कल तलक दिल को लुभाता था ये लेकिन,
शोर अब, तूफान होता जा रहा है,
लग रहा है, दर्द ही दिल की दवा है,
शाप अब वरदान होता जा रहा है,
आदमी गुमनाम होता जा रहा है,
भीड़ ज्यों- ज्यों बढ़ रही है रास्तों पर,
और पथ सुनसान होता जा रहा है,
कल तलक दिल को लुभाता था ये लेकिन,
शोर अब, तूफान होता जा रहा है,
लग रहा है, दर्द ही दिल की दवा है,
शाप अब वरदान होता जा रहा है,
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