बेवजह यूँ ही जीने से क्या फायदा,
बेसबब अश्क पीने से क्या फायदा,
जिसके जीवन में साहिल न तूफाँ कोई,
तू ही कह उस सफीने से क्या फायदा,
बिना मेहनत पसीने से क्या फायदा,
बिना साक़ी के पीने से क्या फायदा
दिल दुखाया जो तूने किसी ग़ैर का,
काशी काबे मदीने से क्या फायदा,
रूह के ग़म भुला कर जहाँ में अगर,
जिस्म रक्खे क़रीने से क्या फायदा,
दिल में उल्फ़त को रख बाजू दमदार तू,
हक़ किसी का भी छीने से, क्या फायदा..
.गुजरा पल ना मिले फिर कभी भी तुझे,
रोए साल और महीने से क्या फायदा,
राज़़ जीवन का है बस इसी में तू सुन,
चमके ना जो नगीने सा क्या फायदा..
.हुश्न कुदरत का बिखरा है, हरसू मगर,
तूने पत्थर ही बीने, तो क्या फायदा,
जिसमें धड़कन न हो, प्यार की दर्द की,
दिल वो नाहक हो सीने में,क्या फायदा,
बेसबब अश्क पीने से क्या फायदा,
जिसके जीवन में साहिल न तूफाँ कोई,
तू ही कह उस सफीने से क्या फायदा,
बिना मेहनत पसीने से क्या फायदा,
बिना साक़ी के पीने से क्या फायदा
दिल दुखाया जो तूने किसी ग़ैर का,
काशी काबे मदीने से क्या फायदा,
रूह के ग़म भुला कर जहाँ में अगर,
जिस्म रक्खे क़रीने से क्या फायदा,
दिल में उल्फ़त को रख बाजू दमदार तू,
हक़ किसी का भी छीने से, क्या फायदा..
.गुजरा पल ना मिले फिर कभी भी तुझे,
रोए साल और महीने से क्या फायदा,
राज़़ जीवन का है बस इसी में तू सुन,
चमके ना जो नगीने सा क्या फायदा..
.हुश्न कुदरत का बिखरा है, हरसू मगर,
तूने पत्थर ही बीने, तो क्या फायदा,
जिसमें धड़कन न हो, प्यार की दर्द की,
दिल वो नाहक हो सीने में,क्या फायदा,
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