देश आपका एक कूड़ाघर
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बुरा लगा सुनकर,तो फिर क्यों,खाकर पान थूक देते हो, बीड़ी पीकर उसके टुकड़े,सिगरेट पीकर उसके टोटे, केले खाकर उसके छिलके,टाफी खाकर उसका रैपर, किसी हाल में,कभी कहीं भी,जानबूझ कर,नासमझी में, फेंक देश में कूड़ा भरते,माँ का आँचल मैला करते,देश के प्रति क्या ये ही भक्ती है,नहीं रही हममें शक्ती है,जो हम थोड़ी मेहनत करके,ये कूड़ेदानों में ड़ाले,जो ऐसा करते हैं अक्सर,उनको रोके उन्हे सुधारें,घर के सब कमरों को झारा,दरवाजे पर कूड़ा सारा,अपने दरवाजे को झारा,बीच सड़क पर कूड़ा सारा,जमा कहीं भी कूड़ा पाया,आग लगाकर उसे जलाया,करके वातावरण विषैला,उसको भी गन्दा कर डाला,चाहे जानवर या पशु पक्षी,कितनी साफ- सफाई रखते,पढे-लिखे होकर भी हमसब,हरपल कितना गन्दा करते,ध्यान नहीं देते हैं हम सब,कहता है कोई बूढ़ा ग़र,जो देखेगा वो कह देगा,पूरा भारत एक कूड़ाघर...
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