Wednesday, 17 April 2013

पापा खाते दही बड़े,मम्मी खातीं दही बड़े,


पापा खाते दही बड़े,
मम्मी खातीं दही बड़े,

दादी कहें यहाँ बैठो,

मत खाओ तुम खड़़े-खड़े,

पिसी दाल के गोले हैं,

सेंक दही में घोले हैं,

सजा मसाला चटनी पर,

राजा जैसे मुकुट जड़े,

मीठा खा सब उकताए,

भइया प्लेट में ले आए,

मुन्नी ढ़ूँढ़ रही छोटे,

चुन्नू ाँटे बडे-बड़े,

दादी हँसकर कहती यूँ,

मिट्टी की हंड़िया में हों,

स्वाद बहुत बढ़ जाता पर,

कहाँ शहर में धरे घड़े,

खील खिलौना लाई भी,

गुझिया और मिठाई भी,

छोड़ उन्हें खुद भाई भी,

खाता देखो दही बड़े,

पापा खाते दही बड़े,


मम्मी खातीं दही बड़े,

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