शुभ
प्रभात मित्रो,
------------------
छलेंगे कबतक,
अनुभव के ये विषैले पुत्र,
कबतक डराएंगी,
दूर की भयावह आहटें,
कबतक,
न पराजित होगा रावण,
आखिर कबतक,
पिएगी ये जमीं खून,
कल की,
सुनहरी फसलों को,
उगाने के लिए,
स्वयं को,
बदलते रहेंगें जल में,
ये दल के दल बादल,
कबतक,
आखिर कबतक....
छलेंगे कबतक,
अनुभव के ये विषैले पुत्र,
कबतक डराएंगी,
दूर की भयावह आहटें,
कबतक,
न पराजित होगा रावण,
आखिर कबतक,
पिएगी ये जमीं खून,
कल की,
सुनहरी फसलों को,
उगाने के लिए,
स्वयं को,
बदलते रहेंगें जल में,
ये दल के दल बादल,
कबतक,
आखिर कबतक....
No comments:
Post a Comment