हर एक वक्त का अंदाज़ जुदा होता है,हर एक वक्त का अपना एक खुदा होता है,
हर एक चीज के यहाँ मायने बदलते हैं,हैं वे ही चेहरे मगर आईने बदलते हैं,
एक था वक्त जब फूलों से थी उल्फत सबको,लोग घर में ही क्या दिल से उन्हें लगाते थे,
आज के दौर में देखो वही चीजें हैं सभी,नफ़ीस दिखने को काँटों से घर सजाते हैं,
एक था वक्त जो दिल में था वही होठों पर,लोग इंसानियत की कद्र किया करते थे,
आज के दौर में सिक्कों की खनक के बदले,अपने ईमान का लोग सौदा किया करते हैं,
एक वो ख्वाब की बातों की आन रखने को,बीबी बच्चे ही क्या खुद को ही बेच देते थे,
आज के दौर में इंसाफ के बदले मानी,झूठ को सर पे सच को सूली चढ़ा देते है,
कभी जो खुशियों का सैलाब ले के आाते थे,वही त्योहार आज ग़म नया जगाते हैं,
चिराग जलना हमेशा पवित्र माना गया,दिये बुझा के आज जन्मदिन मनाते है,
ऐ मेरे दिल कहीं ये रस्मे न खा जाये हमें,उजेली रातों में मैं सो नहीं पाता हूँ कभी,
चाँदनी की कसम बेताब हुए दिल की जलन का दर्द दिल में लिए पहरों तिलमिला हूँ,
अपने बेख्वाब खयालों के साये में छुपकर,एक अंजान सी दुनिया में मैं खो जाता हूँ,
जहाँ पे प्यार का बदला वफा से मिलता है,जहाँ पे जा के दिल बेइख्तियार खिलता है,
जहाँ से नग्मों को मेरे पुकारती है जमीं,जहाँ कि जिन्दगी के मायने अभी हैं वही,
अपनी ये बातें खयालों में किया करता हूँ,जहर या अमिय हो अपने में पिया करता हूँ,
जान ले ग़र ये जमाना तो ख़फा होता है,क्योंकि हर वक्त का अंदाज जुदा होता है...
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