Sunday, 21 April 2013

धीरज का धीरज डोला है,रो कर सूनापन बोला है,
साँसों की पीड़ा गाती है,इस युग ने भेजी पाती है,
उत्तर की तू खोज खबर ले,कलम आज तैयारी कर ले,

सुन अय रोष दिलाने वाले,सुन अय होश गँवाने वाले,
तेरी नइया बीच भँवर है,आने वाला घोर समर है,
जान हथेली पर तू धर ले,,कलम आज तैयारी कर ले,

संघर्षों में घुस कर जीना,तम के सब आँसू हैं पीना,
देख जुल्म जब खाय सनाका,ज़़ुल्मी की औकात भला क्या,
भृकुटि आज तू तिरछी कर ले,इस मौसम का रूप निखर ले,

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