बनी नज़ीर लड़ी थी जो, मर्दानी ढ़ूँढ़ रहा हूँ,
बुंदेलों के मुँह की वही, कहानी ढ़ूँढ़ रहा हूँ,
धर्म जाति मज़हब के ऊँचे, कोलाहल में खोया,
न्याय प्रीति का जज़्बा वो, इंसानी ढ़ूँढ रहा हूँ,
शब्दों के फैले जंगल में, मानी ढ़ूँढ़ रहा हूँ,
कभी आम थी चीज वही, लासानी ढ़ूँढ़ रहा हूँ...
समता न्याय विभेद नहीं है, संविधान के अंदर,
वर्ग जाति अन्याय भेद का, कोलाहल है घर-घर,
प्रजातंत्र और समानता है,मुर्दा शब्द किताबों के,
कितनी बार खोखले होते देखे, दावे वादों के,
नहीं आँख में करूणा का मैं पानी,ढ़ूँढ़ रहा हूँ,
अंतर में अंगार लिए कुर्बानी ढ़ूँढ़ रहा हूँ...
दबी निरीह बिवश समझौतों की आदी लगती है,
पैरों खेली जाने वाली, एक गेंद दिखती है,
ज़ुल्म सामने देख रही, और नहीं बोल पाती है,
कुचले जाते हक़, आगे बढ़ नहीं छीन लाती है,
तूफानों में नइया, भाग्य भरोसे पर खे ती है,
हर सवाल का उत्तर एक,हमें क्या,से देती है,
नहीं झूठ के घर की मैं दरबानी, ढ़ूँढ़ रहा हूँ,
झुके नहीं मिट जाए,वही जवानी ढ़ूँढ़ रहा हूँ,
बदली परिभाषा में,बात पुरानी ढ़ूँढ़ रहा हूँ,
कभी आम थी चीज वही,लासानी ढ़ूंढ़ रहा हूँ,
शब्दों के फैले जंगल में,मानी ढ़ूँढ़ रहा हूँ,
बुंदेलों के मुँह की वही कहानी ढ़ूँढ़ रहा हूँ....
बुंदेलों के मुँह की वही, कहानी ढ़ूँढ़ रहा हूँ,
धर्म जाति मज़हब के ऊँचे, कोलाहल में खोया,
न्याय प्रीति का जज़्बा वो, इंसानी ढ़ूँढ रहा हूँ,
शब्दों के फैले जंगल में, मानी ढ़ूँढ़ रहा हूँ,
कभी आम थी चीज वही, लासानी ढ़ूँढ़ रहा हूँ...
समता न्याय विभेद नहीं है, संविधान के अंदर,
वर्ग जाति अन्याय भेद का, कोलाहल है घर-घर,
प्रजातंत्र और समानता है,मुर्दा शब्द किताबों के,
कितनी बार खोखले होते देखे, दावे वादों के,
नहीं आँख में करूणा का मैं पानी,ढ़ूँढ़ रहा हूँ,
अंतर में अंगार लिए कुर्बानी ढ़ूँढ़ रहा हूँ...
दबी निरीह बिवश समझौतों की आदी लगती है,
पैरों खेली जाने वाली, एक गेंद दिखती है,
ज़ुल्म सामने देख रही, और नहीं बोल पाती है,
कुचले जाते हक़, आगे बढ़ नहीं छीन लाती है,
तूफानों में नइया, भाग्य भरोसे पर खे ती है,
हर सवाल का उत्तर एक,हमें क्या,से देती है,
नहीं झूठ के घर की मैं दरबानी, ढ़ूँढ़ रहा हूँ,
झुके नहीं मिट जाए,वही जवानी ढ़ूँढ़ रहा हूँ,
बदली परिभाषा में,बात पुरानी ढ़ूँढ़ रहा हूँ,
कभी आम थी चीज वही,लासानी ढ़ूंढ़ रहा हूँ,
शब्दों के फैले जंगल में,मानी ढ़ूँढ़ रहा हूँ,
बुंदेलों के मुँह की वही कहानी ढ़ूँढ़ रहा हूँ....
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