ग़ैर के आगे सिर नीचा हो,काम तू ऐसा करना मत,
राह बुराई की हो उससे, होके कभी गुजरना मत,
संघर्षों में घुसकर जी,डरना जीवन का काम नहीं,
मौत आये तो गले लगाना,मौत से पहले मरना मत,
Sunday, 21 April 2013
धीरज का धीरज डोला है,रो कर सूनापन बोला है,
साँसों की पीड़ा गाती है,इस युग ने भेजी पाती है,
उत्तर की तू खोज खबर ले,कलम आज तैयारी कर ले,
सुन अय रोष दिलाने वाले,सुन अय होश गँवाने वाले,
तेरी नइया बीच भँवर है,आने वाला घोर समर है,
जान हथेली पर तू धर ले,,कलम आज तैयारी कर ले,
संघर्षों में घुस कर जीना,तम के सब आँसू हैं पीना,
देख जुल्म जब खाय सनाका,ज़़ुल्मी की औकात भला क्या,
भृकुटि आज तू तिरछी कर ले,इस मौसम का रूप निखर ले,
साँसों की पीड़ा गाती है,इस युग ने भेजी पाती है,
उत्तर की तू खोज खबर ले,कलम आज तैयारी कर ले,
सुन अय रोष दिलाने वाले,सुन अय होश गँवाने वाले,
तेरी नइया बीच भँवर है,आने वाला घोर समर है,
जान हथेली पर तू धर ले,,कलम आज तैयारी कर ले,
संघर्षों में घुस कर जीना,तम के सब आँसू हैं पीना,
देख जुल्म जब खाय सनाका,ज़़ुल्मी की औकात भला क्या,
भृकुटि आज तू तिरछी कर ले,इस मौसम का रूप निखर ले,
कह न पाएगी कलम जिनकी कथा को,
सह सके थे, जो न अंतर की व्यथा को,
हाथ में अपने ज्वलित अंगार लेकर,
हो प्रकंपित शत्रुमद हुँकार लेकर,
मातृ भू को शीश देकर वंदना की,
स्वत्व को छीना,नहीं झुक याचना की,
प्राण दे देना था,जिनको खेल जैसा,
वीरता के साथ भय का मेल कैसा,
आज मैं वह ज्योति फिर से माँगता हूँ,
ध्वंस का आह्वान फिर से चाहता हूँ,
जो कि सुख की राह को आगे बढ़ाएगी,
शांति की सरिता नहीं तो सूख जाएगी,
सह सके थे, जो न अंतर की व्यथा को,
हाथ में अपने ज्वलित अंगार लेकर,
हो प्रकंपित शत्रुमद हुँकार लेकर,
मातृ भू को शीश देकर वंदना की,
स्वत्व को छीना,नहीं झुक याचना की,
प्राण दे देना था,जिनको खेल जैसा,
वीरता के साथ भय का मेल कैसा,
आज मैं वह ज्योति फिर से माँगता हूँ,
ध्वंस का आह्वान फिर से चाहता हूँ,
जो कि सुख की राह को आगे बढ़ाएगी,
शांति की सरिता नहीं तो सूख जाएगी,
Wednesday, 17 April 2013
सुबह हो गयी बिल्लू बेटे,अब तो आँखें खोलो,
सुबह हो गयी बिल्लू बेटे,
अब तो आँखें खोलो,
आलस भाग जाएगा सारा,
पानी से मुँह धोलो,
अच्छा उठता हूँ कह पहले,
आँख जरा सी खोली,
उठ कर लिपट गया मम्मी से,
तब मम्मी यह बोली-
पहले शौच जाओ फिर बेटे,
साफ करो दाँतों को,
खाने-पीने से पहले तुम,
साफ करो हाथों को,
अगर करोगे ऐसा फिर तुम,
कभी न हो बीमार,
राजा बेटा बन पाओगे,
माँ का पूरा प्यार,
अब तो आँखें खोलो,
आलस भाग जाएगा सारा,
पानी से मुँह धोलो,
अच्छा उठता हूँ कह पहले,
आँख जरा सी खोली,
उठ कर लिपट गया मम्मी से,
तब मम्मी यह बोली-
पहले शौच जाओ फिर बेटे,
साफ करो दाँतों को,
खाने-पीने से पहले तुम,
साफ करो हाथों को,
अगर करोगे ऐसा फिर तुम,
कभी न हो बीमार,
राजा बेटा बन पाओगे,
माँ का पूरा प्यार,
पापा खाते दही बड़े,मम्मी खातीं दही बड़े,
पापा खाते दही बड़े,
मम्मी खातीं दही बड़े,
दादी कहें यहाँ बैठो,
मत खाओ तुम खड़़े-खड़े,
पिसी दाल के गोले हैं,
सेंक दही में घोले हैं,
सजा मसाला चटनी पर,
राजा जैसे मुकुट जड़े,
मीठा खा सब उकताए,
भइया प्लेट में ले आए,
मुन्नी ढ़ूँढ़ रही छोटे,
चुन्नू छाँटे बडे-बड़े,
दादी हँसकर कहती यूँ,
मिट्टी की हंड़िया में हों,
स्वाद बहुत बढ़ जाता पर,
कहाँ शहर में धरे घड़े,
खील खिलौना लाई भी,
गुझिया और मिठाई भी,
छोड़ उन्हें खुद भाई भी,
खाता देखो दही बड़े,
पापा खाते दही बड़े,
मम्मी खातीं दही बड़े,
मम्मी खातीं दही बड़े,
दादी कहें यहाँ बैठो,
मत खाओ तुम खड़़े-खड़े,
पिसी दाल के गोले हैं,
सेंक दही में घोले हैं,
सजा मसाला चटनी पर,
राजा जैसे मुकुट जड़े,
मीठा खा सब उकताए,
भइया प्लेट में ले आए,
मुन्नी ढ़ूँढ़ रही छोटे,
चुन्नू छाँटे बडे-बड़े,
दादी हँसकर कहती यूँ,
मिट्टी की हंड़िया में हों,
स्वाद बहुत बढ़ जाता पर,
कहाँ शहर में धरे घड़े,
खील खिलौना लाई भी,
गुझिया और मिठाई भी,
छोड़ उन्हें खुद भाई भी,
खाता देखो दही बड़े,
पापा खाते दही बड़े,
मम्मी खातीं दही बड़े,
सर्दी जानेवाली है,गर्मी आनेवाली है,
सर्दी जानेवाली है,
गर्मी आनेवाली है,
दूर हटेगी रजईया,
मच्छर काटेंगे भइया,
स्वेटर बक्से में होंगे,
अपने खूब मजे होंगे,
होली में रंग खेलेंगे,
गुझिया पूरी लेंगे,
अब तो रोज नहाएगे,
फिर स्कूल को जाएंगे,
दो आशीष हमें ईश्वर,
आएं जो अच्छे नंम्बर,
मेहनत का हम फल पाएं,
अगली कक्षा में जाएं
गर्मी आनेवाली है,
दूर हटेगी रजईया,
मच्छर काटेंगे भइया,
स्वेटर बक्से में होंगे,
अपने खूब मजे होंगे,
होली में रंग खेलेंगे,
गुझिया पूरी लेंगे,
अब तो रोज नहाएगे,
फिर स्कूल को जाएंगे,
दो आशीष हमें ईश्वर,
आएं जो अच्छे नंम्बर,
मेहनत का हम फल पाएं,
अगली कक्षा में जाएं
कल तक चुप थे आज मगर हम, दिल की बात जरूर कहेंगे,
कल तक चुप थे आज मगर हम, दिल की बात जरूर कहेंगे,
तन को सुखी कर लें मन की पर, कैसे गरीबी दूर करेंगे,
मन का सुख ही सच्चा सुख है,सोचेंगे सब इन मसअ्लों पर,
नकली शक्ल दिखाने वाला,जब आईना चूर करेंगे,
पत्थर के संसार में, पत्थर दिल होंगे पर राम नहीं,
मन की आँखें खोल के कब ये, सच्चाई मन्जूर करेंगे,
हम ही तेरे सच्चे आशिक हैं,वक्त इसे दोहराएगा,
लिख लो आने वाले मुसाफिर, कल हमको मशहूर करेंगे,
सारे शहर की लगी निगाहें आज आपके ऊपर हैं,
कथनी और करनी का अंतर, कब तक दूर हुजूर करेंगे,
तन को सुखी कर लें मन की पर, कैसे गरीबी दूर करेंगे,
मन का सुख ही सच्चा सुख है,सोचेंगे सब इन मसअ्लों पर,
नकली शक्ल दिखाने वाला,जब आईना चूर करेंगे,
पत्थर के संसार में, पत्थर दिल होंगे पर राम नहीं,
मन की आँखें खोल के कब ये, सच्चाई मन्जूर करेंगे,
हम ही तेरे सच्चे आशिक हैं,वक्त इसे दोहराएगा,
लिख लो आने वाले मुसाफिर, कल हमको मशहूर करेंगे,
सारे शहर की लगी निगाहें आज आपके ऊपर हैं,
कथनी और करनी का अंतर, कब तक दूर हुजूर करेंगे,
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