Thursday, 3 November 2016

कभी कुछ बात कहना और कहना ... चलो रहने दो
कभी कुछ कहते कहते कह देना ... चलो रहने दो
ये अदाएं तुम्हारी ख़ास लगती हैं न जाने क्यूँ
कभी सोचा की कह डालूं,कभी सोचा ... चलो रहने दो
जताना भी नहीं आता कि ये तुमसे कैसा रिश्ता है
तुम्हारे साथ चलता मैं , फिर सोचा ... चलो रहने दो
मेरी बेक़रारी का आलम क्या है किसे जा कर बताऊँ मैं
था ये सोचा तुम को बताऊंगा , फिर सोचा...चलो रहने दो
ख्वाहिश है ये मेरी तुम्हे जी भर कर देखूं मैं
तुम्हारी तस्वीर बनाता मैं , फिर सोचा ... चलो रहने दो
जो तुम रूठ जाओगी तो ग़ज़ल कह कर मना लूँगा
ऐसे जो मानूं तो कहती हो , अच्छा ... चलो रहने दो
रहेगी उम्मीद जब तक ये हमारे एक होने की
डर है तुम कह न दो , उम्मीद को ... चलो रहने दो.
दीवाली के दीप जले,
मन को लगते बहुत भले,
तम मन का बाहर निकले,
अंतर ज्योती विमल जले,
अंधियारा जग से फिसले,
दीवाली के दीप जले,
बैर दूर हो, हाथ मले,
सदभावों की हवा चले,
नफरत की जो वर्फ,गले,
प्रीत लपक कर गले मिले,
मन पर कोई हर्फ न ले,
दीवाली के दीप जले,
धमाके ही धमाके थे,
पटाखे ही पटाखे थे,
हुई जब शाम रौशन तो,
तिमिर के घर में फाके थे,
मनाई रात दीवाली,
नहीं था कोई अँधियारा,
दिए की लड़ियों के आगे,
अँधेरा डर गया, हारा,
अगर सब साथ मिल यूं ही,
भगाएंगे अँधेरों कोे,
न रोके रोका जा पाएगा,
आने से सवेरों को,
और करें लौ को ऊँचा,
दुनिया की खुशहाली में,
यू.एन.ओ. का कार्यालय,
जगमग हुआ दिवाली में,
अच्छी बात बढ़ाएं जग में,
गन्दी बातें नाली में,
यू.एन.ओ. का कार्यालय भी,
जगमग हुआ दिवाली में,
बोतल में राकेट चलाएं,
चकरी नाचे थाली में,
यू.एन.ओ. का कार्यालय भी,
जगमग हुआ दिवाली में,
नन्हे मुन्ने बच्चे हैं हम,
ये संकल्प उठाते हैं,
सुंदर प्यारा देश हमारा,
मिलकर स्वच्छ बनाते हैं,
कल-कल करती पावन नदियां,
सबको जीवन देतीं हैं,
हरदम हरपल देतीं ही हैं,
कुछ ना हमसे लेतीँ हैं,
पूजन इनका यही,न इसमें,
डाले कोई सामग्री,
साफ स्वच्छ हम नदियाँ रक्खें,
है सच्ची अर्चना यही,
घर , स्कूल, सड़क, स्टेशन,
अस्पताल, उद्यान कोई,
मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे जैसे,
पावन स्थान सभी,
देवालय से पहले शौचालय है,
वे बतलाते हैं,
सुन्दर प्यारा देश हमारा,
मिलकर स्वच्छ बनाते हैं,
कूड़ा हो कूड़ेदानोँ में,
शपथ यही हम लेते हैं,
खुद करके दिखलाए सबको,
ये संदेशा देते हैं,
गाँव, शहर, सब गलियां अपनी,
सुंदर देश हमारा है,
जो इनको रक्खेगा सुंदर,
वह ही हमको प्यारा है,
आजादी में साँसें लेते,
ये हम पर उनका उपकार,
अब हमको मिलकर देना ही होगा,
उनको ये उपहार,
बापू का संदेशा सारे जग में,
मिल फैलाते हैं,
नन्हे-मुन्ने बच्चे हैं हम,
ये संकल्प उठाते हैं,
सुंदर प्यारा देश हमारा,
मिलकर स्वच्छ बनाते हैं,
हम हैं पहरेदार ,
आपकी गलियों के रखवाले,
हम हैं जहाँ वहाँ डर कैसा,
क्यों डालेँ फिर ताले,
दोस्त और दुश्मन की,
आँखों में रखते पहचान सदा,
माने अपना जिसे,
लुटा दें उस पर अपनी जान सदा,
नन्हा दिया
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हाँ जी हाँ मैं हूँ एक नन्हा दिया,
मैंने जीवन है उसूलों पे जिया,
दे के स्नेह रोशनी बाँटी,
और बदले में तम का ज़हर लिया,
ज्योति का वंशधर हूँ आँगन में,
रोशनी भर लो अपने तन मन में,
फ़र्ज कर पूरा, मिलूँ मिट्टी में,
चाहो तो अर्थ ले लो जीवन में,
हाँ जी हाँ मैं हूँ एक नन्हा दिया,
जिन्दगी को है उसूलों पे जिया,
हाँ जी हाँ ...