Monday, 22 May 2017

लो यहाँ पे आ गए हम,
यूँ ही साथ-साथ चलते,
हो न ग़म किसी को हमसे,
यही देखते-सँभलते,

गुजरे बरस पचीसों,
इस राह में हमारी,
मिलती रही है छाया,
यूँ ही छाँव में तुम्हारी,
लेकर आशीष पिता का,
जीवन पथ पर बढ़ जाएं,
सागर में गहरे तैरें,
गिरि के शिखरों चढ़ जाए,
माँ का तो प्यार हमेशा,
बिन माँगे मिलता रहता,
दिल पर रख हाथ बताओ,
क्या कोई गलत मैं कहता,
सबकी जेबों में रहते हो,
हो आखिर तुम किसके पैसे,
आम संतरे टॉफी खाते
वो, होते हैं जिसके पैसे,

बोले दादाजी गौरव से,
जेब से मेरी खिसके पैसे,
गौरव हँस कहता दादा से,
पास में जिसके उसके पैसे,
दादाजी ने फिर समझाया,
गौरव बेटा ऐसा कैसे,
चीज के बदले चीज मिले
या मेहनत की है कीमत पैसे,
पैसों से खट्टा मीठा लो,
फिर वो चाहो चक्खो जैसे,
पहले मीठी सी पप्पी दो,
फिर जेबों में रक्खो पैसे,
बूढ़ा पिता अपने IAS बेटे के चेंबर में जाकर उसके कंधे पर हाथ रख कर खड़ा हो गया !
और प्यार से अपने पुत्र से पूछा...
"इस दुनिया का सबसे शक्तिशाली इंसान कौन है"?

पुत्र ने पिता को बड़े प्यार से हंसते हुए कहा "मेरे अलावा कौन हो सकता है पिताजी "!
पिता को इस जवाब की आशा नहीं थी, उसे विश्वास था कि उसका बेटा गर्व से कहेगा पिताजी इस दुनिया के सब से शक्तिशाली इंसान आप हैैं, जिन्होंने मुझे इतना योग्य बनाया !
उनकी आँखे छलछला आई ! वो चेंबर के गेट को खोल कर बाहर निकलने लगे !
उन्होंने एक बार पीछे मुड़ कर पुनः बेटे से पूछा एक बार फिर बताओ इस दुनिया का सब से शक्तिशाली इंसान कौन है ???
पुत्र ने इस बार कहा- "पिताजी आप हैैं, इस दुनिया के सबसे शक्तिशाली इंसान "!
पिता सुनकर आश्चर्यचकित हो गए ।
उन्होंने कहा "अभी तो तुम अपने आप को इस दुनिया का सब से शक्तिशाली इंसान बता रहे थे अब तुम मुझे बता रहे हो " ???
पुत्र ने हंसते हुए उन्हें अपने सामने बिठाते हुएकहा-"पिताजी उस समय आप का हाथ मेरे कंधे पर था, जिस पुत्र के कंधे पर या सिर पर पिता का हाथ हो वो पुत्र तो दुनिया का सबसे शक्तिशाली इंसान ही होगा ना,,,,,
बोलिए पिताजी" !
पिता की आँखे भर आई उन्होंने अपने पुत्र को कस कर के अपने गले लग लिया !
बड़े दिनों के बाद हैं आए,
छुट्टी वाले दिन,
कितना मेरे मन को भाए,
छुट्टी वाले दिन,

रोज-रोज जल्दी उठने की,
भागमभाग नहीं,
अब तो जब हम उठ जाएंगे,
होगी सुबह तभी,
पापा मम्मी भी अब ज्यादा,
जोर नहीं देंगे,
'छुट्टी है सोने दो' आपस में,
मिल कह लेंगे,
बस्ता कापी पेंसिल से अब,
कुट्टी वाले दिन,
बहुत दिनों के बाद हैं आए,
छुट्टी वाले दिन,
जाएंगे हम सब मिलकर,
दादी नानी के गाँव,
जहाँ नदी का शीतल जल,
पेड़ों की ठंड़ी छाँव,
तोड़ डाल से आम और जामुन,
हम खाएंगे,
दोस्त गाय बकरी के संग,
खेतों में जाएंगे,
भूलेंगे सर की मैडम की,
घुट्टी वाले दिन,
बहुत दिनों के बाद हैं आए,
छुट्टी वाले दिन,
काश कहीं से मिल जाए,
हमको ऐसी पावर,
बुर्ज खलीफा पर घूूमें,
टहलें एफिल टावर,
सागर के नीचे की दुनियां,
देखें जी भर के,
नभ के तारे सभी खंगालें,
एक-एक कर के,
किस्से और कहानी झूठा-
झुट्ठी वाले दिन,
बहुत दिनों के बाद हैं आए,
छुट्टी वाले दिन,
ओशो से किसी ने पूछा -‎
"राजनीतिक लुच्चे-लफंगों से देश को छुटकारा कब मिलेगा?"
ओशो ने कहा - "बहुत कठिन है। क्योंकि प्रश्न राजनेताओं से छुटकारे का नही है, प्रश्न तो तुम्हारे अज्ञान के मिटने का है ? तुम जब तक अज्ञानी हो, कोई न कोई तुम्हारा शोषण करता ही रहेगा, कोई न कोई तुम्हे चूसेगा ही !-
‎पंडित चूसेंगे , पुरोहित चूसेंगे , मुल्ला-मौलवी चूसेंगे , राजनेता चूसेंगे तुम जब तक जाग्रत नही हो, तब तक लुटोगे ही ? फिर किसने लूटा, क्या फर्क पड़ता है ? किस झण्डे की आड़ में लुटे, क्या फर्क पड़ता है ?
‎समाजवादियों से लुटे कि साम्यवादियों से, क्या फर्क पड़ता है ? तुम तो लूटोगे ही ! लूटेरों के नाम बदलते रहेंगे और तुम लुटते रहोगे !
'इसलिए ये मत पूछो कि राजनैतिक लुच्चे-लफंगों से देश का छुटकारा कब होगा? यह प्रश्न ही अर्थहीन है ? ये पूछो कि मै कब इतना जाग सकूँगा कि झूठ को झूठ की तरह पहचान सकूँ ? और जब तक सारी मनुष्य- जाति झूठ को झूठ की भाँति नहींं पहचानती, तब तक छुटकारे का कोई उपाय नहीं है।‎
राह में तुम मत सोना
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माँ ने सब्जी लेने चुन्नू को,
भेजा बाजार,
लगे राह में खेल खेलने,
बन्द हुआ बाजार,
खाली हाथ लौटकर आए,
डाँट पड़ी डटकर,
चुन्नू गुस्से में बोले-अब,
नहीं घुसेंगे घर,
माँ ने हँसकर कहा-
बिना सब्जी के खाना खाना,
आज नहीं ला पाए तो फिर,
कल सुबह ले आना,
मेहनत का फल अच्छा,
लापरवाही ठीक न होती,
जीत पे हँसती ये आँखें,
और असफलता पर रोती,
जीवन में पल-पल पर ऐसी,
मुश्किल घड़ियाँ आतीं,
पर वे आसमान पर छाई,
बदली सी हट जातीं,
सीखो सबक हर एक गलती से,
ऐसे कभी न रोना,
आँखों में मंज़िल को रख लो,
राह में अब मत सोना,