नीलकंठ तुम नीले रहियो, मेरी बात भगवान से कहियो,
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प्रेम सै दुनिया आय जो बस में,
फिर क्यों लोग लड़ैं आपस में,
फिर क्यों लोग लड़ैं आपस में,
आवौ फिर सै जा समझईयो,
मेरी बात...
मेरी बात...
खाय न पामैं रोटी कल सै,
हमैं निकारौ जा दल दल सै,
हमैं निकारौ जा दल दल सै,
हम खुस रहैं, रहै खुस भईयौ,
मेरी बात...
मेरी बात...
चार दिना की जा जिनगानी,
सिगरी दुनिया आनी जानी,
सिगरी दुनिया आनी जानी,
कौन हमेसा के लये रईयौ,
मेरी बात...
मेरी बात...
रजनीकान्त शुक्ल
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