रात अचानक आँख खुली तो,
खिड़की के बाहर देखा,
खूब रोशनी बिखर रही थी,
सोचा बल्ब खुला छोड़ा,
आया बाहर धवल चाँदनी,
पसरी हुई सकल भू पर,
अप्रतिम था सौंदर्य खज़ाना,
खुला हुआ नीचे-ऊपर,
खिड़की के बाहर देखा,
खूब रोशनी बिखर रही थी,
सोचा बल्ब खुला छोड़ा,
आया बाहर धवल चाँदनी,
पसरी हुई सकल भू पर,
अप्रतिम था सौंदर्य खज़ाना,
खुला हुआ नीचे-ऊपर,
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