Wednesday, 16 October 2013

इंसाफ का तराजू जब हाथ में उठाए,जुर्मों को ठीक तोले,
ऐसा न हो कि कल का इतिहासकार बोले,
मुज़रिम से भी जियादा, मुन्सिफ ने जुल्म ढ़ाया,
कीं पेश उसके आगे, ग़म की गवाहियाँ भी,
रक्खीं नज़र के आगे, दिल की तबाहियाँ भी,
उसको यकीं न आया, इंसाफ कर न पाया,
और अपने इस अमल से,बदकार मुज़रिमों के,
नापाक हौसलों को, कुछ और भी बढ़ाया,

इंसाफ का तराजू जो हाथ में उठाए,ये बात याद रक्खे,
सब मुंसिफों से ऊपर,एक और भी है मुन्सिफ,
वो दो जहाँ का मालिक सब हाल जानता है,
नेकी के और बदी के अहवाल जानता है,
दुनिया के फैसलों से मायूस जाने वाला,
ऐसा न हो कि उसके दरबार में पुकारे,
ऐसा न हो कि उसके इंसाफ का तराजू ,एक बार फिर से तोले-
मुज़रिम के ज़ुल्म को भी,मुन्सिफ की भूल को भी,
और अपना फैसला दे,वो फैसला कि जिससे हर रूह काँप उट्ठे,
आइये बहार को हम बाँट लें,
जिन्दगी के प्यार को हम बाँट लें,
मिलके रोएं मिलके मुस्कुराएं हम,
अपनी जीत हार को हम बाँट ले,

जिसके पास हो खुशी,थोड़ी सी खुशी दे दे,
जो बेबस हो बेचारा अपनी बेबसी दे दे,
दर्द की फुहार को हम बाँट ले,
जिन्दगी के प्यार को हम बाँट लें,

प्यासा ना रहे कोई,भूखा ना सोए कोई,
तन्हा न हँसे कोई, तन्हा न रोए कोई,
आँसुओं की धार को हम बाँट लें,
जिन्दगी के प्यार को हम बाँट लें,

आइये बहार को हम बाँट लें,
जिन्दगी के प्यार को हम बाँट लें,
रावण का कद
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कभी जातिवादी दबाव में,
कभी धर्मवादी प्रभाव में,
कभी अर्थ के ही अभाव में,
कभी व्यक्तिगत स्वार्थभाव में,

सच से जब हम आँख चुराते,
रावण का कद बढ़ जाता है

देख गरीबों की लाचारी,
देख अमीरों की अय्यारी,
देख सियासत की मक्कारी,
देख लुट रही जनता सारी,

मूक बने जब चुप रह जाते,
रावण का कद बढ़ जाता है

सुख समृद्धि ऐश भौतिकता,
खाम-खयाली है नैतिकता,
बनती जब ऐसी मानसिकता,
परदे में छिपती वास्तविकता,

हक़ तब नहीं नज़र आता है,
रावण का कद बढ़ जाता है,

अपने जाने अनजाने में,
या औरों के उकसाने में,
कहें सफलता वह पाने में,
हद से आगे बढ़ जाने में,

जब औरों से होड़ लगाते,
रावण का कद बढ़ जाता है,

Friday, 11 October 2013

पैरों की हड़ताल
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जब ईनाम दौड़ का देने, गरिमा को बुलवाया,
पैरों ने हड़ताल करी,एक कदम न बढ़़ने पाया,

सारे थे हैरान, भला क्यों पैर करें नादानी,
पूछा तो पैरों ने कह दी अपनी राम कहानी,

मैने मेहनत की और दौड़ा पहला नम्बर पाया,
मेहनत जब मेरी ईनाम क्यों हाथों को दिलवाया,

करे उसी को मिले,भला है ये इंसाफ निराला,
मैं तो जाऊँ जब ईनाम हो,मुझको मिलने वाला,

सुनकर पैरों की ये चख-चख पीठ हुसक कर रोई,
बड़े न्याय वाले बनते हो, लाज शरम सब खोई,

कल जब जीभ चटक्खे ले, आमों के बाग गई थी,
रखवाले का लट्ठ पड़ा मुझ पर, ये बात सही थी,

खाया मुँह ने मार पड़ी मुझ पर,क्यों भला बताओ,
आाखिर ये है न्याय कहाँ का भाई मेरे समझाओ,

आपस में अंगों का झगड़ा, सुन शरीर मुसकाया,
मिलजुलकर सब काम करें यदि, सुखी रहेगी काया,

रखवाले को देख, वहाँ से पैर भाग जो जाते,
मुँह को मिलता स्वाद,पीठ पर लट्ठ न पड़ने पाते,

अगर रहें मिलजुलकर हम,तो दुनिया कर लें वश में,
मुट्ठी बंद लाख की, हम जो लड़ें नहीं आपस में,

आई बात समझ में, सबने मिलकर कदम बढ़ाया,
गूँज उठीं तालीं,जब गरिमा ने ईनाम वो पाया,
मेरा सपना
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मेरा सपना कितना अच्छा,
हे ईश्वर हो जाए सच्चा,

बिना पढ़े ही इम्तहान में,
आएं नम्बर सबसे ज्यादा,
सुबह शाम मेरे खेलकूद में,
कोई नहीं पहुँचाए बाधा,

सभी कहे मुझे प्यारा बच्चा,
मेरा सपना कितना अच्छा,

मेरी कभी किसी गलती पर,
मार न बिलकुल पड़ने पाए,
और पापा मम्मी खुश होकर,
मनचाहे सामान दिलाएं,

मन में मेरी ऐसी इच्छा,
मेरा सपना कितना अच्छा,

हे ईश्वर हो जाए सच्चा,
मेरा सपना कितना अच्छा,

आज अकल है आई
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कौआ एक कहीं से टुकड़ा रोटी का ले आया,
सोचा उसने बैठ डाल पर,जाए इसको खाया,

तभी कहीं से बिल्ली आई,बोली-कौआ मामा,
सुना बुज़ुर्गों से हमने,तुम गाते अच्छा गाना,

अच्छा अब तुम जल्दी से,तारीफ हमारी पाओ,
हम तो माने तब,जब हमको मीठा गीत सुनाओ,

चोंच से पंजे में कौए ने, रोटी तुरत दबाई,
बोला-बिल्ली मौसी हमको,आज अकल है आई,

आज नहीं आसान हमारी मेहनत को यूँ खाना,
बैठो रोटी खा लूँ, फिर मैं तुम्हें सुनाऊँ गाना,

खाना अच्छा नहीं किसी की मेहनत,धोखा देकर,
चल दी यही सोचती बिल्ली अपना सा मुँह लेकर,

सदियों से कौओं की मेहनत रही बिल्लियाँ खाती,
कोई भी गंदी आदत हो, जाते-जाते जाती,

आसमान में उड़ी पतंग
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आसमान में उड़ी पतंग,
ऊपर ऊपर चढ़ी पतंग,
जरा संभालो अपनी डोर,
देखो देखो लड़ी पतंग,

नीचे खींचो ऊपर जाती,
कभी भाग नीचे को आती,
तनिक अँगुलियाँ करें इशारा,
तरह तरह के नाच दिखाती,

भाग रहे पीछे ललचाए,
काश गिरे हमको मिल जाए,
सोनू मोनू ने खुश होकर,
 जी भर भर कर पेंच लड़ाए,

कितने रंगों भरी पतंग,
 लो छत पर गिर पड़ी पतंग,
जिधर इशारा किया हाथ ने,
उधर हवा में मुड़ी पतंग,

हाथ में कापी आँखें ऊपर,
और आँखों में मढ़ी पतंग,
ऊपर ऊपर चढ़ी पतंग,
आसमान में जड़ी पतंग,