Friday, 11 October 2013

आसमान में उड़ी पतंग
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आसमान में उड़ी पतंग,
ऊपर ऊपर चढ़ी पतंग,
जरा संभालो अपनी डोर,
देखो देखो लड़ी पतंग,

नीचे खींचो ऊपर जाती,
कभी भाग नीचे को आती,
तनिक अँगुलियाँ करें इशारा,
तरह तरह के नाच दिखाती,

भाग रहे पीछे ललचाए,
काश गिरे हमको मिल जाए,
सोनू मोनू ने खुश होकर,
 जी भर भर कर पेंच लड़ाए,

कितने रंगों भरी पतंग,
 लो छत पर गिर पड़ी पतंग,
जिधर इशारा किया हाथ ने,
उधर हवा में मुड़ी पतंग,

हाथ में कापी आँखें ऊपर,
और आँखों में मढ़ी पतंग,
ऊपर ऊपर चढ़ी पतंग,
आसमान में जड़ी पतंग,

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