मेरा हर दर्द अपना आप,
दरमा होता जाता है,
चमक में आँसुओं की,
इक हँसी मालूम होती है,
दरमा होता जाता है,
चमक में आँसुओं की,
इक हँसी मालूम होती है,
मिटाया था तेरी खातिर,
निशाने अक्शे हस्ती तक,
तेरी हस्ती मगर हस्ती,
मेरी मालूम होती है,
निशाने अक्शे हस्ती तक,
तेरी हस्ती मगर हस्ती,
मेरी मालूम होती है,
कभी कभी खुदी का,
नाम तक बाकी नहीं रहता,
कभी लेकिन खुदी ही,
बेखुदी मालूम होती है,
नाम तक बाकी नहीं रहता,
कभी लेकिन खुदी ही,
बेखुदी मालूम होती है,
चिरागे रह बनेंगे एक दिन,
नक्शे कदम मेरे,
अभी रफ्तार मेरी,
गुमरही मालूम होती है,
नक्शे कदम मेरे,
अभी रफ्तार मेरी,
गुमरही मालूम होती है,
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