घर के अंदर बैठी रिया पढ़ाई कर रही थी। माँ अंदर रसोई में घरेलू काम में उलझी हुई थी। रिया के पापा भी इस समय घर पर थे। रिया को बचपन से ही पढ़ने का शौक था। सो कभी उसके मम्मी पापा ने उसे पढने से नहीं रोका। न तो बाहर स्कूल में पढ़ने जाने में और न ही घर पर पढ़ने में।
जब भी कभी रिया पढने बैठती मम्मी उसे काम करने की न कहतीं। या तो वे खुद काम कर लेतीं या उसे बाद पर टाल देतीं। अव्वल तो रिया ही उन्हें कुछ भी कहने का मौका न हीं देती। वह माँ के काम में हाथ बँटाना अपनी जिम्मेदारी समझती थी। अपनी समझ से सारे काम निबटाने के बाद ही पढ़ने बैठती थी।
आज भी कुछ ऐसा ही हुआ। रिया का छोटा भाई स्कूल जा चुका था और अभी - अभी वह पढ़ने बैठी थी। यह मार्च महीने की दस तारीख थी। यू पी बोर्ड की परीक्षाएं अमूमन इसी महीने में होतीं हैं।
उसकी पढ़ाई में व्यवधान न हो इसलिए एक - एक कर उसके मम्मी पापा दोनों घर के बाहर निकल गए।
रिया के पापा एक सीधे सादे किसान थे। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली जिले में रहते और उसका विशेष ध्यान रखते थे। रिया का भी अपने पापा से विशेष लगाव था।
अभी वह प्रश्नोत्तरों को एक बार पढ़कर उन्हें दोबारा से दोहराने की तैयारी कर रही थी। उसे बाहर की ओर से आता हुआ शोर सुनाई दिया। पहले तो उसने इस ओर ध्यान नहीं दिया मगर जब लड़ाई की आवाजों के बीच जब उसे अपने पापा की आवाज सुनाई दी तो वह अपने आप को ना रोक सकी।
जब वह घर से बाहर निकल कर आई तो बाहर का माहौल बहुत अशांत था। उसके ताऊ और पापा से कुछ लोग जोर - जोर से चिल्लाते हुए लड़ रहे थे। कोई जमीन के बारे में विवाद था। जो उन लोगों और उसके पापा , ताऊ के बीच काफी समय से चल रहा था। वैसे तो रिया के पापा शांत स्वभाव के थे मगर जब कोई घर पर चढ़ कर आए और उल्टा - सीधा बोले तो कोई अपने गुस्से पर काबू कहाँ तक रखे।
अब बातचीत में तेजी आती जा रही थी। विरोधी लगातार हावी होने की कोशिश कर रहे थे। वे हमलावर हो रहे थे। और अब तो उन्होंने हाथों में अवैध हथियार लहराने शुरू कर दिए। रिया को लगा कि आज कुछ बड़ी गड़बड़ होने वाली है। रिया के ताऊ ने उन लोगों से चले जाने के लिए कहा।
मगर वे कई लोग थे और आज कुछ सोच कर ही आए थे। बात बढने पर अचानक उनमें से एक ने आगे बढ़कर हवा में गोली चला दी। चारो तरफ अफरा - तफरी फैल गई। वे तेजी से रिया के पापा की ओर बढ़े।
किसी अनहोनी की आशंका से रिया पापा की ओर दौड़ी। और फिर वही हुआ जिसका डर था एक हमलावर रिया के पापा का निशाना बनाकर पिस्तौल तान दी।
किसी के ‘हिम्मत है तो चला गोली’- कहते ही उसने हिम्मत दिखाते हुए गोली चला दी। मगर इसी बीच रिया तेजी से पापा और गोली के बीच आ गई। वह गोली रिया को लगी। चारो तरफ ‘हाय’ ‘हाय’ का शोर मच गया। रिया की माँ भी दौड़ती हुई आईं और हमलावरो की चलाई गोली का शिकार बनकर घायल होकर गिर गईं।
लडकी के गोली लगते ही वहाँ का माहौल बदल गया। ऐसे में हमलावरों ने भी भागने में ही अपनी भलाई समझी। इधर रिया के सीने में गोली लगते देख सब उसे बचाने दौड़े। उसके पापा ने उसे बाहों में भर लिया।
वे उसे और उसकी माँ को लेकर डाक्टर के पास पहुँचे मगर तब तक देर हो चुकी थी। रिया की मम्मी तो बच गईं परन्तु रिया को न बचाया जा सका। रिया ने अपने सीने पर गोली खा ली मगर अपने पापा पर आँच न आने दी।
रिया के साहस और बलिदान ने सुनने और जानने वाले सभी लोगों की आँखें नम कर दीं। उसकी बहादुरी और प्रेम ने सभी को हैरत में डाल दिया। देश के प्रधानमंत्री जी ने उसे मरणोपरांत राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया।
बापू गयाधानी राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार पाते समय रिया के पापा और मम्मी की आँखों के सामने उसका प्यारा चेहरा बार - बार आ रहा था। मानो वह कह रही हो - ‘पापा मैं तुम्हारी बेटी हूँ, तुम्हें कुछ नहीं होने दूँगी।’पापा की आँखों से आँसू रोकने की कोशिश में छलके जा रहे थे।
दोस्तो -
हम चिडियों सी चहक चहक, घर चिचियाहट से भर दें,
हँस-हँस कर गम की सारी स्थिति परिवर्तित कर दें,
इस रोती - धोती दुनिया को हँसने का अवसर दें,
अमृत दें, हमको बदले में चाहे लोग जहर दंे,
आज भी कुछ ऐसा ही हुआ। रिया का छोटा भाई स्कूल जा चुका था और अभी - अभी वह पढ़ने बैठी थी। यह मार्च महीने की दस तारीख थी। यू पी बोर्ड की परीक्षाएं अमूमन इसी महीने में होतीं हैं।
उसकी पढ़ाई में व्यवधान न हो इसलिए एक - एक कर उसके मम्मी पापा दोनों घर के बाहर निकल गए।
रिया के पापा एक सीधे सादे किसान थे। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली जिले में रहते और उसका विशेष ध्यान रखते थे। रिया का भी अपने पापा से विशेष लगाव था।
अभी वह प्रश्नोत्तरों को एक बार पढ़कर उन्हें दोबारा से दोहराने की तैयारी कर रही थी। उसे बाहर की ओर से आता हुआ शोर सुनाई दिया। पहले तो उसने इस ओर ध्यान नहीं दिया मगर जब लड़ाई की आवाजों के बीच जब उसे अपने पापा की आवाज सुनाई दी तो वह अपने आप को ना रोक सकी।
जब वह घर से बाहर निकल कर आई तो बाहर का माहौल बहुत अशांत था। उसके ताऊ और पापा से कुछ लोग जोर - जोर से चिल्लाते हुए लड़ रहे थे। कोई जमीन के बारे में विवाद था। जो उन लोगों और उसके पापा , ताऊ के बीच काफी समय से चल रहा था। वैसे तो रिया के पापा शांत स्वभाव के थे मगर जब कोई घर पर चढ़ कर आए और उल्टा - सीधा बोले तो कोई अपने गुस्से पर काबू कहाँ तक रखे।
अब बातचीत में तेजी आती जा रही थी। विरोधी लगातार हावी होने की कोशिश कर रहे थे। वे हमलावर हो रहे थे। और अब तो उन्होंने हाथों में अवैध हथियार लहराने शुरू कर दिए। रिया को लगा कि आज कुछ बड़ी गड़बड़ होने वाली है। रिया के ताऊ ने उन लोगों से चले जाने के लिए कहा।
मगर वे कई लोग थे और आज कुछ सोच कर ही आए थे। बात बढने पर अचानक उनमें से एक ने आगे बढ़कर हवा में गोली चला दी। चारो तरफ अफरा - तफरी फैल गई। वे तेजी से रिया के पापा की ओर बढ़े।
किसी अनहोनी की आशंका से रिया पापा की ओर दौड़ी। और फिर वही हुआ जिसका डर था एक हमलावर रिया के पापा का निशाना बनाकर पिस्तौल तान दी।
किसी के ‘हिम्मत है तो चला गोली’- कहते ही उसने हिम्मत दिखाते हुए गोली चला दी। मगर इसी बीच रिया तेजी से पापा और गोली के बीच आ गई। वह गोली रिया को लगी। चारो तरफ ‘हाय’ ‘हाय’ का शोर मच गया। रिया की माँ भी दौड़ती हुई आईं और हमलावरो की चलाई गोली का शिकार बनकर घायल होकर गिर गईं।
लडकी के गोली लगते ही वहाँ का माहौल बदल गया। ऐसे में हमलावरों ने भी भागने में ही अपनी भलाई समझी। इधर रिया के सीने में गोली लगते देख सब उसे बचाने दौड़े। उसके पापा ने उसे बाहों में भर लिया।
वे उसे और उसकी माँ को लेकर डाक्टर के पास पहुँचे मगर तब तक देर हो चुकी थी। रिया की मम्मी तो बच गईं परन्तु रिया को न बचाया जा सका। रिया ने अपने सीने पर गोली खा ली मगर अपने पापा पर आँच न आने दी।
रिया के साहस और बलिदान ने सुनने और जानने वाले सभी लोगों की आँखें नम कर दीं। उसकी बहादुरी और प्रेम ने सभी को हैरत में डाल दिया। देश के प्रधानमंत्री जी ने उसे मरणोपरांत राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया।
बापू गयाधानी राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार पाते समय रिया के पापा और मम्मी की आँखों के सामने उसका प्यारा चेहरा बार - बार आ रहा था। मानो वह कह रही हो - ‘पापा मैं तुम्हारी बेटी हूँ, तुम्हें कुछ नहीं होने दूँगी।’पापा की आँखों से आँसू रोकने की कोशिश में छलके जा रहे थे।
दोस्तो -
हम चिडियों सी चहक चहक, घर चिचियाहट से भर दें,
हँस-हँस कर गम की सारी स्थिति परिवर्तित कर दें,
इस रोती - धोती दुनिया को हँसने का अवसर दें,
अमृत दें, हमको बदले में चाहे लोग जहर दंे,
No comments:
Post a Comment